दो संतानों की मर्यादा पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
बुलढाणा जिले की काकोडा ग्रा.प. की पूर्व सरपंच मंगला इंगले ने दायर की थी याचिका

अमरावती/नई दिल्ली/दि.15- दो से अधिक संतान रहनेवाले व्यक्ति को स्थानिय स्वायंत निकाहे का चुनाव लढने से प्रतिबंधित करनेवाले कानून की व्यवहारिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने देश में घटती प्रजनन दर का दाखला देते हुए सवालियां निशान उपस्थित किए साथ ही इस कानून की वैदता व मूल उद्देश पर व्यापक विचार करने का संकेत भी दिया.
बता दे कि, महाराष्ट्र ग्रा.पं. अधिनियम की धारा 14 (1) (जे-1) के अनुसार 13 सितंबर 2000 के बाद तिसरी संतान होनेवाले व्यक्ति को चुनाव लढने व किसी पद पर रहने हेतू स्थायी रूप से अपात्र ठहराया गया है. इस कानून से प्रभावित होने के चलते बुलढाणा जिले की संग्रामपुर तहसिल अंतर्गत काकोडा ग्रामपंचायत की पूर्व सरपंच मंगला इंगले ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए गुहार लगाई थी. मंगला इंगले को इसी कानून के तहत सरपंच पद हेतु अपात्र ठहराया गया था. मंगला इंगले की याचिका पर न्या. पी.एस. नरसिम्मा, न्या. अलोक आराध्य की खंडपीठ के समक्ष गत रोज सुनवाई हुई.
इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि,मौजुदा दौर में इस कानून की प्राथमिकता खत्म हो गई है. सन 2003 में जब अदालत ने जावेद बनाम हरियाणा राज्य के मामले की सुनवाई करते हुए इस कानून को मंजुरी दी थी तब देश की परिस्थिती काफी अलग थी. लेकिन अब देश में कुल प्रजनन दर काफी कम हो गया है. और इन दिनों किसी दंपति को तीन संताने रहना अपने आप में काफी दुर्लब बात है. जिसके चलते इस नीति ने अपना प्रभाव खो दिया है. ऐसे में इस निति को भविष्य में भी कायम रखना पूरी तरह से असंवैधानिक साबित हो सकता है. इसके अलावा अदालत ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि, यह कानून अपने मुल उद्देश की बजाय राजनितिक विरोधियों को अपात्र ठहराने हेतू एक प्रभावी शस्त्र के तौर पर ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है.
क्या था मामला
मंगला इंगले के खिलाफ शिकायत होने के उपरांत 14 अक्तुंबर 2024 को अतिरिक्त जिलाधिश ने उन्हें सरपंच पद हेतु अपात्र ठहराया था.
– अतिरिक्त जिलाधिश के आदेश के खिलाफ मंगला इंगले व्दारा अतिरिक्त आयुक्त के पास अपिल दायर की गई थी. परंतु इस अपिल को भी 25 अप्रैल 2025 को खारीज कर दिया गया था.
– इन दोनों आदेशों को मंगला इंगले ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी. परंतु हायकोर्ट ने 5 अगस्त 2025 को मंगला इंगले की याचिका नामंजुर कर दी थी. जिसके चलते मंगला इंगले ने न्याय मिलने हेतु सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई.
अॅड. रूक्मिणी बोबडे ने अदालत मित्र के तौर पर किया प्रभावी युक्तिवाद
इस मुद्दे पर सखोल विचार मंथन करने हेतु अदालत ने राज्य सरकार की वकील अॅड. रूक्मिणी बोबडे की न्यायलयीन मित्र के तौर पर नियुक्ति करते हुए उन्हें दो संतानों की निति से संबंधित नियम व शब्द लागू रहनेवाले 7 राज्यों के कानूनों तथा द इकॉनॉमिस्ट नामक अंतराष्ट्रीय मासिक में प्रकाशित भारत की घटती प्रजनन दर पर आधारित लेख का अध्ययन करने हेतु कहा. साथ ही याचिका करता के वकील अॅड. प्रतिक बोबडे को भी इस विषय पर इस विषय पर संशोधन करने का निर्देश दिया. दोनों वकीलों को आगामी 28 जुलाई को पूरी जानकारी का संकलन रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश अदालत व्दारा दिया गया है.





