शिवधारा झूलेलाल चालिहा जो 16 जुलाई से 25 अगस्त तक चलेगा
आरंभ हुआ अनुष्ठान

* पहले दिन ही भारी संख्या में भक्तों ने उपस्थित रहकर की पूजा-अर्चना
अमरावती/दि.17- जब सिंधी हिंदुओं पर आपातकाल आया था, तब उन्होंने दरिया पर जाकर वरुण देव को पुकारा था, वरुण देव भगवान ने उनकी पुकार सुनकर 1007 संवत में नसरपुर नाम के गांव में शुक्रवार के दिन चैत्र मास की दूज तिथि को भगवान श्री झूलेलाल के रूप में अवतार धारण किया था. तब से इस 40 दिन की अनुष्ठान की परंपरा प्रारंभ हुई, जो विश्व भर के सिंधी समाज में मनाया जाता है. जिसमें एक कृत्याग्यता का भाव है, दुख दूर हों, सुख की बढ़ोतरी हो, साधना भक्ति बड़े एवं प्रभु प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना भी उद्देश्य रहता है. हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूज्य शिवधारा झूलेलाल चालिहा 16 जुलाई गुरुवार से प्रारंभ हुआ.
पहले दिन ही में कई भारी संख्या में भक्त जनों ने उपस्थित होकर पूजा अर्चना की. पूज्य शिवधारा आश्रम सिंधु नगर में श्री शिव महापुराण, श्री रामायण, श्रीमद् भागवत महापुराण, श्री गुरु ग्रंथ साहिब एवं श्री शिवधारा अमृत ग्रंथ के पाठ पारायण प्रारंभ हुए, साथ-साथ में हर वर्ष के भांति अखंड ओम नमः शिवाय का जप भी प्रारंभ हुआ, जो 25 अगस्त तक चालू रहेंगे. इस अवसर पर परम पूज्य संत श्री डॉ संतोष देव जी महाराज ने कहा कि अगर आज हम इस तपस्या में नहीं जुड़े, तो कहीं तो भी हमारा नुकसान हो रहा है, क्योंकि भविष्य को किसने देखा है, अभी नहीं तो कभी नहीं. जितना भी संभव हो जैसे चातुर्मास के नियमों की भांति सात्विक भोजन खाना, भूमि शयन करना, बाल नाखून ना कटवाना, एक समय का भोजन करना, आध्यात्मिक वर्ती में रहना, साधना सेवा सत्संग अधिक से अधिक करने का प्रयास करना आदि नियमों का पालन करने से मनचाहा फल प्राप्त होगा. यह परंपरा 1008 सद्गुरु स्वामी शिवभजन जी महाराज की कृपा से हो रही है. जिसमें सुबह 8.30 से 10.30 तक पूज्य शिवधारा आश्रम सिंधु नगर में मनाया जाएगा और रात्रि 9.30 से 11.30 बजे तक नानकानी धर्मशाला रामपुरी में भी मनाया जाएगा. इन सभी पूजा पाठ एवं सत्संग कार्यों में आकर हम कृपा प्राप्त करें ऐसा निवेदन शिवधारा समिति कर रही है.





