दो नाबालिग बेटियों से दुष्कर्म करने वाले पिता को मौत तक उम्रकैद

अमरावती जिला अदालत का ऐतिहासिक फैसला

* पोक्सो एक्ट के तहत दोषी करार, सबूत मिटाने और धमकी देने के अपराध में भी सजा
अमरावती /दि.17– अमरावती की जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ बार-बार दुष्कर्म करने वाले पिता को शेष जीवन अर्थात प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रमांक-2 वाई. ए. गोस्वामी की अदालत ने 16 जुलाई को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. पीड़िताओं की पहचान गोपनीय रखने के लिए आरोपी का नाम भी उजागर नहीं किया गया है.
अभियोजन के अनुसार आरोपी और उसकी पत्नी वर्ष 2015 से अलग रह रहे थे. उनकी तीन बेटियां हैं, जिनमें से दो नाबालिग बेटियां कुछ समय तक आरोपी के साथ रहती थीं. इसी दौरान आरोपी ने दोनों बेटियों का कई बार यौन शोषण किया. उसने एक पीड़िता के खून से सने कपड़े जलाकर सबूत मिटाने का प्रयास किया तथा दूसरी बच्ची को बांधकर रखा. साथ ही घटना की जानकारी किसी को देने पर दोनों बेटियों और उनकी मां की हत्या करने की धमकी भी दी.
बाद में जब बड़ी बहन उनसे मिलने पहुंची तो दोनों बहनों ने रोते हुए पूरी आपबीती बताई. बड़ी बहन दोनों को उनकी मां के पास ले आई. इसके बाद मां ने चाईल्डलाइन की मदद से गाडगेनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. जांच के दौरान मामला नांदगांव पेठ पुलिस थाने को स्थानांतरित किया गया, जहां 10 मार्च 2023 को झजउडज अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. मामले की जांच तत्कालीन एपीआई कविता पाटिल ने की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए. पीड़ित बच्चियों और चिकित्सकों की गवाही को अदालत ने महत्वपूर्ण माना. अदालत ने आरोपी को पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. इसके अलावा सबूत नष्ट करने के अपराध में तीन वर्ष के कारावास और दो हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया. अभियोजन पक्ष की ओर से जिला सरकारी वकील एड. परीक्षित गणोरकर ने पैरवी की, जबकि एएसआई विनोद कनौजिया और हेड कांस्टेबल अरुण हटवार ने न्यायालयीन कार्यवाही में सहयोग किया.

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