नहीं रोका गया तोडने का काम, पुरानी स्टेशन इमारत जल्द नेस्तनाबूद
हैरिटेज और अन्य बातें रह गई धरी

* अकोला के ठेकेदार और कर्मचारी लगे हैं तोडक काम में
अमरावती/दि.31- 1953 में बने अमरावती रेलवे स्टेशन की पुरातन इमारत तोडने का कार्य सोमवार को भी जारी रहा. इस बारे में हेरिटेज इमारत के बचाव और रखरखाव की सभी डिमांड अनसुनी रह जाने का समाचार है. अमरावती मंडल प्रतिनिधि ने मौके पर जाकर देखा कि, अकोला ठेकेदार और उनके साथी तोडक कार्रवाई में जुटे हैं. उन्होंने पुराने मुख्य प्रवेशद्वार रहे भवन और उसके पास की छत को धराशाही करने के साथ भवन में लगी समस्त लकडी एकत्र कर ली थी. बता दें कि, कुछ समाचार पत्रों में अमरावती स्टेशन की पुरानी बिल्डींग की तोडक कार्रवाई रोके जाने संबंधी खबरे प्रकाशित हुई थी, किंतु आज चौथे दिन भी तोडफोड जारी रही.
उल्लेखनीय है कि, उक्त इमारत 1953 में बनकर तैयार हुई थी और उसका तत्कालीन अधिकारियों द्वारा उद्घाटन किए जाने की शीला वहां मौजूद है. ऐसे में सांसद बलवंत वानखडे और पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने पुराने भवन को बचाए जाने, उसके जतन करने की मांग बुलंद की थी. उनका यह भी आरोप था कि, एक के बाद एक अमरावती की अनेक ऐतिहासिक वास्तु नेस्तनाबूत की जा रही है.
गत 28 अगस्त से अमरावती स्टेशन की पुरानी बिल्डींग तोडक कार्रवाई शुरु की गई. जिसका समाचार अमरावती मंडल ने प्रमुखता से दिया था. बता दें कि, इसी इमारत की बगल में रेलवे डाक सेवा का काउंटर मौजूद है. उस काउंटर तक जाने के लिए अलग से अस्थायी मार्ग बनाया गया है. इधर तोडक कार्रवाई चलती रही. ठेकेदार और उनके दर्जनों श्रमिक लगे रहे. पुरानी बिल्डींग का अधिकांश हिस्सा ढहा दिया जा रहा है. उसके बचाव और रखरखाव के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं.





