आखिर पकड़ में आया दूसरा नर तेंदुआ भी
राजुरा जलशुद्धीकरण केंद्र परिसर में सुबह 6 बजे पूरी हुई रेस्क्यू कार्रवाई

अमरावती/दि.31- अमरावती शहर के मार्डी रोड स्थित राजुरा जलशुद्धीकरण केंद्र परिसर में दहशत का कारण बने दूसरे नर तेंदुए को भी वन विभाग की टीम ने शनिवार तड़के सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया. सुबह करीब 5.45 बजे तेंदुए को पकड़ने की कार्रवाई सफल हुई और लगभग 6 बजे पूरा रेस्क्यू अभियान समाप्त किया गया. तेंदुए के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र के नागरिकों और जलशुद्धीकरण केंद्र के कर्मचारियों ने राहत की सांस ली.
जानकारी के मुताबिक राजुरा जलशुद्धीकरण केंद्र और मार्डी रोड परिसर में तेंदुए की लगातार मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद वन विभाग उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा था. इससे पहले इसी क्षेत्र से एक अन्य तेंदुए का भी रेस्क्यू किया जा चुका था. दूसरे तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम लगातार अभियान चला रही थी. शनिवार को पकड़े गए नर तेंदुए की उम्र करीब 10 वर्ष बताई गई है. वन विभाग की टीम ने गुरुवार और शुक्रवार को देर रात तक इलाके में निगरानी रखी. शनिवार तड़के सुनियोजित तरीके से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया. तेंदुआ नजर की जद में आते ही वनपाल अमोल गावनेर ने वाहन से ही डार्ट गन के जरिए उसे बेहोश किया. इसके बाद तेंदुए को सुरक्षित रूप से पिंजरे में स्थानांतरित किया गया. रेस्क्यू के दौरान तेंदुए को चोट न पहुंचे और आसपास के लोगों की सुरक्षा बनी रहे, इसका विशेष ध्यान रखा गया. कार्रवाई के बाद वन विभाग की टीम ने तेंदुए की स्थिति की जांच की और उसके सुरक्षित होने की पुष्टि की. इस अभियान में वनपाल अमोल गावनेर के साथ यूथ फॉर नेचर कंज़र्वेशन ऑर्गनायजेशन की टीम ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया. संगठन की ओर से डॉ. स्वप्निल सोनोने, शंतनु पाटिल, वात्सल्य धोत्रे और राहुल धामेचा ने रेस्क्यू टीम के साथ मिलकर कार्रवाई में भाग लिया.
* नागरिकों ने ली राहत की सांस
मार्डी रोड और जलशुद्धीकरण केंद्र परिसर में तेंदुए की गतिविधियां सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में लगातार चिंता बनी हुई थी. क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए उसे सुरक्षित पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ था. दूसरे नर तेंदुए के भी सुरक्षित रेस्क्यू होने से अब क्षेत्र के नागरिकों ने राहत की सांस ली है. वन विभाग और यूथ फॉर नेचर कंज़र्वेशन ऑर्गनायजेशन की संयुक्त टीम के सतर्क एवं समन्वित प्रयासों से शनिवार सुबह करीब 6 बजे रेस्क्यू अभियान सफलतापूर्वक पूरा हुआ.
कर जांच के आदेश
महापौर ने अधिकारियों को नाले में अस्पताल का जैव-चिकित्सकीय कचरा और खराब सामग्री फेंकने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए. साथ ही संबंधित अस्पताल की जानकारी जुटाकर मामले की जांच करने तथा नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जैव-चिकित्सकीय कचरे को खुले में या नालों में फेंकने से नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
* ‘नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा’
महापौर श्रीचंद तेजवानी ने चेतावनी दी कि नालों में मेडिकल अथवा जैव-चिकित्सकीय कचरा फेंककर नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि नाले कचरा फेंकने के लिए नहीं, बल्कि बारिश के पानी की निकासी के लिए होते हैं. इनमें प्लास्टिक, घरेलू कचरा और खराब सामग्री डालने से पानी का प्रवाह बाधित होता है और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है. मनपा ने संबंधित स्वास्थ्य निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने और कचरा फेंकने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. निरीक्षण के दौरान नगरसेवक एडवोकेट प्रशांत देशपांडे, जोन क्रमांक 2 के सहायक आयुक्त भूषण पुसतकर और स्वास्थ्य निरीक्षक प्रशांत गावनेर उपस्थित थे.





