पंचमी पर 15 हजार सुवासिनियों ने भरी दोनों देवियों की ओटी

140 से 150 रुपये में मिल रही ओटी

* साड़ी-चोली के साथ कीमत 1,000 रुपये तक
* महंगाई के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार
अमरावती/दि.16 – शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर अमरावती की आराध्य देवी श्री अंबादेवी और श्री एकवीरा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. गुरुवार, 15 अक्टूबर को पंचमी के अवसर पर करीब 15 हजार सुवासिनियों ने दोनों देवियों की ओटी भरकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की. सुबह से ही मंदिर परिसर में महिलाओं की कतारें लगी रहीं. श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है.
* 140 से 150 रुपये में उपलब्ध है ओटी
नवरात्रि के दौरान देवी की ओटी भरने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है. इसमें खान, नारियल, सुपारी, हल्दी, खारिक, बादाम, चावल और चोटी सहित विभिन्न पूजन सामग्री रखी जाती है. मंदिर परिसर के आसपास स्थित दुकानों में पूजा सामग्री की ओटी 140 से 150 रुपये में उपलब्ध है. वहीं, साड़ी-चोली के साथ ओटी भरने पर इसका खर्च करीब 1 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. इस साल नवरात्रि के दौरान ओटी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. पिछले वर्ष की तुलना में पूजा सामग्री 30 से 40 रुपये महंगी हुई है, जबकि नारियल के दाम में भी 15 से 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद देवी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कमी नहीं आई है.
* एकवीरा बड़ी बहन, अंबादेवी छोटी बहन
अंबादेवी मंदिर के ठीक दक्षिण दिशा में श्री एकवीरा देवी का मंदिर स्थित है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, एकवीरा देवी को बड़ी बहन और अंबादेवी को छोटी बहन माना जाता है. नवरात्रि में विशेषकर पंचमी और अष्टमी जैसे पवित्र दिनों पर अमरावती सहित पूरे विदर्भ से हजारों महिलाएं दोनों देवियों के दर्शन करने पहुंचती हैं. पारंपरिक परिधान में मंदिर पहुंचने वाली सुवासिनियां देवी के चरणों में माथा टेकती हैं और हल्दी, कुमकुम, चावल, नारियल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर ओटी भरती हैं. यह धार्मिक परंपरा परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना से जुड़ी हुई है.
* मंदिर में ओटी की सामग्री का विशेष प्रबंध
श्रद्धालुओं के मन में अक्सर सवाल उठता है कि हजारों महिलाओं द्वारा भरी जाने वाली ओटियों की सामग्री का मंदिर में क्या किया जाता है. मंदिर में इसकी एक विशेष व्यवस्था है. सुवासिनियां देवी को जो सामग्री अर्पित करती हैं, उसके बदले उन्हें पहले आई किसी अन्य श्रद्धालु द्वारा अर्पित की गई सामग्री दी जाती है. इस तरह नारियल, चोटी, खान और साड़ी-चोली जैसी सामग्री का आदान-प्रदान होता रहता है. इसलिए मंदिर में हजारों ओटियों का अलग से बड़ा संग्रह नहीं होता. ओटी भरने के बाद बचने वाले चावल मंदिर को दिए जाते हैं, जिनका उपयोग भोजन व्यवस्था में किया जाता है.
* श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
नवरात्रि के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट ने दर्शन तथा ओटी भरने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं. आवश्यकता के अनुसार ओटी स्वीकार करने वाले पुजारियों की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि महिलाओं को अधिक देर तक कतार में इंतजार न करना पड़े और वे सुविधापूर्वक धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर सकें. श्री अंबादेवी संस्थान के ट्रस्टी रवींद्र कर्वे ने बताया कि पंचमी के अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने ओटी भरी. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है और जरूरत के अनुसार इंतजाम किए जा रहे हैं.
* महंगाई के बावजूद आस्था कायम
पूजा सामग्री और नारियल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद महिलाएं पूरे उत्साह से देवी की ओटी भर रही हैं. श्रद्धालु वैशाली असालकर ने बताया कि इस साल ओटी महंगी हुई है, लेकिन देवी के प्रति श्रद्धा के कारण उन्होंने कीमत की परवाह किए बिना ओटी भरी. नवरात्रि के आगामी दिनों में भी दोनों मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है. मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन और ओटी भरने की व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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