935 का सिलेंडर 1600 में

शहर में कई स्थानों पर जमकर कालाबाजारी.

* फिर कहते हैं सिलेंडर नहीं मिल रहा
* कमर्शियल भी डबल पैसे में लिए जा रहे
अमरावती/ दि.21 – खाडी युध्द के कारण कच्चे तेल और पेट्रोलियम पदाथों के बेतहाशा भाव बढने के बीच देश में कमर्शियल सिलेंडर पर निजी कंपनियों को देने पर प्रतिबंध लगाया गया. उसी प्रकार घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम सीधे 60 रूपए बढा दिए गये. इसके बावजूद सिलेंडर नहीं मिलने की हाय तौबा की जारही है. जबकि शहर के अनेक भागों में घरेलू सिलेंडर 1500- 1600 रूपए के रेट पर ब्लैक कर बेचा जा रहा है. अनेक लोगों ने शिकायत दी कि उनके एरिया में घरेलू इस्तेमाल का गैस हंडा (सिलेंडर ) धडल्ले से डेढ गुना दाम पर बेचा जा रहा है. वहीं व्यवसायिक सिलेंडर भी डबल पैसे में उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है.
कौन खरीद रहा अधिक दाम पर
घरेलू एलपीजी हंडा अधिक दाम पर बेचे जाने की शिकायतें रवि नगर से लेकर गाडगे नगर और दस्तूर नगर से लेकर बडनेरा तक देखने सुनने मिल रही है. लोग यह भी सोच रहे हैं कि लगभग डबल दाम देकर कौन यह सिलेंडर खरीद रहे हैं. उसका सीधा उत्तर यही है कि छोटे मोटे चाय, नाश्ते के स्टॉल चलानेवाले, होटल संचालक और कैटरिंग सेवा के लोग यह गैस हंडे खरीद रहे हैं. उन्हें भी अपना धंधा जारी रखना है. कैटरिंग संचालकों ने महीनों पहले विवाह और अन्य प्रसंगों के ऑर्डर लिए थे. उस समय पता न था कि खाडी युध्द की वजह से न केवल सिलेंडर के रेट भडक जायेंगे. बल्कि सिलेंडर मिलना दूभर हो जायेगा. ऐसे ही कैटरर्स बता रहे हैं कि कुछ लोग मजबूरी का लाभ लेने पर आमादा है. उन्हें अधिक दाम देने के सिवा चारा नहीं.
निजी कंपनियां कर रही उपलब्ध
सरकारी तेल कंपनियां व्यवसायिक 19 किलो का सिलेंडर केवल अस्पताल, सरकारी कार्यालयों की कैंटीन में निर्देशानुसार सप्लाइ्र जारी रखे हुए हैं. वहीं कुछ निजी कंपनियां भी मार्केट में है. जो व्यवसायिक 19 किलो का सिलेंडर उपलब्ध करवा रही है. इस सिलेंडर का रेट करीब 2 हजार रहने पर भी होटल संचालक एवं केटरर्स दो गुना दाम करीब 4 हजार चुका रहे हैं. यह दावा लोगों ने शिकायत और बातचीत में किया.
कितने दिन चलेगा धंधा
सिलेंडर की कालाबाजारी का गौरखधंधा और कितने दिन चलेगा, इसका हिसाब नहीं है. युध्द जारी रहने के कारण देश में बाहर से आनेवाली गैस और पेट्रोलियम पदाथों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रखी है. ऐसे में और भी कुछ दिन लोगोें को अपने ऑर्डर पूर्ण करने ब्लैक में सिलेंडर लेना पड रहा है. वहीं कुछ लोगों ने इंधन के पर्याय खोज लिए हैं. उन्होंने पुरानी डीजल भट्टियां दोबारा शुरू कर ली है तो कहीं कहीं लकडी की भट्टियां भी भोजन बनाने के काम आ रही है तथापि उसका खर्च भी लगभग दोगुने दामके सिलेंडर जितना होने की आशंका हैं. खाडी युध्द के कारण आया गैस संकट सभी को प्रभावित कर रहा है. होटल और कैटरिंग व्यवसाय के लोगों को परेशान कर रहा है. उन्हें भी अपनी सेवा के दाम बढाने के सिवा चारा नहीं है. इसलिए आम ग्राहकों पर दोहरी मार पड रही है. उन्हें मैन्यू के आयटम कम किए जाने और उपलब्ध व्यंजनों, खान पान की चीजों के दाम अधिक चुकाने पड रहे हैं.
क्या कहता है प्रशासन
इस बारे में आपूर्ति अधिकारियों से चर्चा करने पर उन्होंने दावा किया कि जिले में प्रत्येक स्थान पर उनके उडनदस्ते निगरानी कर रहे हैं. रोज ही कहीं न कहीं घरेलू इस्तेमाल के सिलेंडर पकडे जा रहे हैं. संबंधितों पर एफआईआर दर्ज होने के साथ कडी कार्रवाई हो रही है. अत: नागरिकों को डीएसओ ने आगाह किया कि वे सिलेंडर की कालाबाजारी और बेजा उपयोग से बचें. डीएसओ ने कडे एक्शन की चेतावनी दी. उन्होंने कालाबाजारी की शिकायत करने का भी आवाहन किया. शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखने का दावा किया.

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