एक पीएसआई और तीन पुलिस कर्मचारी की एक वर्ष की वेतनवृध्दि रोकी

हवालात से आरोपी फरार होने का मामला

* चारों जवान नागपुरगेट थाने में थे कार्यरत
* पुलिस आयुक्त राकेश ओला की कार्रवाई
अमरावती/दि.12- शहर में कानून की रक्षा करने की जिम्मेदारी रखनेवाले पुलिस जवानों की लापरवाही उन्हें महंगी पडी है. नागपुरी गेट थाने के हवालात से आरोपी के फरार होने के मामले को पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने गंभीरता से लेते हुए कडे कदम उठाए है. इस प्रकरण में एक पीएसआई समेत चार जवानों पर वेतन वृध्दि रोकने की कार्रवाई की गई हैं. इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हडकंप मच गया है.
सरकारी काम में दिखाई गई लापरवाही और आरोपी की सुरक्षा की तरफ की गई अनदेखी के कारण पुलिस दल की प्रतिमा मलीन होने का आरोप करते हुए यह सजा सुनाई गई है. इस प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली गई तब पता चला कि 4 अक्तूबर 2017 को नागपुरी गेट पुलिस ने मारपीट और हत्या के आरोप में तीन संदिग्धों को कब्जे में लिया था. नियमानुसार इन आरोपियों की वैद्यकिय जांच और खून के नमूने लेने के लिए उन्हें जिला अस्पताल में ले जाया गया था. जांच अधिकारी अवकाश पर रहते पुलिस उपनिरीक्षक पंकज गुप्ता, पुलिस कर्मचारी इरफान अली रायलीवाले, विक्रम नशीबरकर और मोहन चव्हाण पर आरोपियों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन इन कर्मचारियों ने लापरवाही बरती. आरोपियों को मनीष यादव के कब्जे में छोडकर चारों कर्मचारी अपनी ड्यूटी छोडकर चले गए. इसी अवसर का लाभ उठाते हुए शेख समीर शेख युनूस नामक आरोपी हाथों में लगी हथकडी निकालकर पुलिस हवालात से भाग गया. इस घटना के बाद पुलिस आयुक्त ने जांंच के आदेश दिए थे. जांच के बाद इन सभी कर्मचारियों ने सुरक्षा में काफी लापरवाही बरती रहने की बात स्पष्ट हुई. इसके तहत इन चारों कर्मचारियों की आगामी एक साल की वेतनवृध्दि रोकी गई है. इस कार्रवाई के कारण पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई है. आगे भी ड्यूटी में लापरवाही बरतनेवालों को माफी नहीं, ऐसे स्पष्ट संकेत प्रशासन ने दिए हैं.
* जांच अधिकारी दोषी
नागपुरी गेट पुलिस स्टेशन के उपनिरीक्षक पंकज गुप्ता समेत अन्य सहयोगियों ने आरोपी शेख समीन सुरक्षा देने और उचित तरिके से देखरेख करने में लापरवाही बरती. जांच अधिकारी की अनुपस्थिति में मौखिक आदेश का उल्लंघन कर आरोपियों को छोडकर जाना पुलिस कर्मचारियों को महंगा पडा है. इस गंभीर गलती के कारण उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर आखिरकार उनकी वेतन वृध्दि रोकने की सजा दी गई.
* एक वर्ष की वेतनवृध्दी रोकी
संबंधित प्रकरण में जांच पूर्ण होने के बाद प्राप्त हुई रिपोर्ट के आधार पर एक पीएसआई और तीन कर्मचारियों की एक साल की वेतनवृध्दि रोकी गई हैं.
– रमेश धुमाल, पुलिस उपायुक्त (निवासी), अमरावती शहर.

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