डॉ. सिकंदर अडवानी के हाथों कला प्रदर्शनी का उद्घाटन

बीमारी पर विजय पाने वाली डॉ. मोनाली गवई की प्रेरणादायी कहानी

* हस्तकला के माध्यम से जीवन को दी नई दिशा
अमरावती / दि.11 – यदि मन में दृढ संकल्प, सकारात्मक सोच और कला के प्रति लगाव हो तो कोई भी कठिनाई इंसान को आगे बढने से नहीं रोक सकती. इसका जीवंत उदाहरण हैं डॉ. मोनाली सुभाष गवई. पिछले कुछ वर्षो से पार्किन्सन बीमारी से संघर्ष करते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी और बेकार वस्तुओं से आकर्षक व कल्पनाशील हस्तकला की वस्तुएं बनाकर अपने जीवन को नई दिशा और नई उर्जा दी है.
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन रेडियंट हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सिकंदर अडवानी और डॉ. सुनीता अडवानी के हाथों किया गया. इस अवसर पर डॉ. सुषमा कोडी, एड सुलभा गवई, डॉ. शुभांगी खमके, डॉ. गोविंद कासट सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरूआत स्त्री शिक्षा की ज्योति प्रज्वलित करनेवाली क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फूले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन कर की गई.
आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डॉ. मोनाली सुभाष गवई द्बारा बनाई गई हस्तकला की वस्तुओं की विशेष प्रदर्शनी 8 मार्च को अमरावती के कांग्रेस नगर रोड स्थित उत्तम सेलिब्रेशन हॉल में आयोजित की गई थी. इस प्रदर्शनी का उद्घाटन अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए डॉ. सिकंदर अडवानी ने डॉ. मोनाली गवई की जिद और साहस की सराहना की. उन्होंने कहा कि आज के समय में जब किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी का सामना करना पडता है, तो गई लोग मानसिक रूप से टूट जाते हैं. लेकिन डॉ. मोनाली गवई ने अपनी बीमारी को कमजोरी न बनने देकर उससे लडने का प्रेरणादायी मार्ग चुना. उन्होंने बेकार वस्तुओं को नया जीवन देकर न केवल सुंदर कलाकृतियां बनाई हैं, बल्कि समाज को भी सकारात्मकता का संदेश दिया है. उनकी यह जिद और आत्मविश्वास हर किसी के लिए प्रेरणा है.
अपने मनोगत में डॉ. मोनाली गवई ने अपने कला- प्रवास को प्रेरणादायी कहानी साझा की. उन्होेेंने कहा कि बीमारी शरीर को होती है, मन को नहीं. मन ही शरीर की असली शक्ति है. इसलिए बीमारी से डरने के बजाय उन्होंने अपने हस्तकला के शौक को आगे बढाया. इस सफर में उन्हें उनके पति डॉ. सुभाष गवई, पुत्र विक्रांत, सास-ससुर और परिवारजनों का भरपूर सहयोग मिला. विशेष रूप से डॉ. सिकंदर अडवानी ने इलाज के साथ- साथ सकारात्मक सोच और कला के माध्यम से स्वयं को व्यक्त करने की प्रेरणा दी.
इस अवसर पर डॉ. सुभाष गवई ने भी अपनी पत्नी की जिद और और साहस की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्त्री घर की शक्ति होती है. उसके सुख- दुख में साथ देना और उसके सपनों व रूचियों को प्रोत्साहित करना हर पति का कर्तव्य है. डॉ. मोनाली की कला से कई लोगों को प्रेरणा मिल रही है. यह मेरे लिए गर्व की बात है. कार्यक्रम में उपस्थित अन्य मान्यवरों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. मोनाली गवई के साहस, जिद और कला के माध्यम से दिए गये सकारात्मक संदेश की सराहना की. इस प्रदर्शनी को देखने के लिए शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों और कला प्रेमियों ने बडी संख्या में उपस्थित होकर कलाकृतियों की प्रशंसा की.
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह प्रदर्शनी केवल कला प्रदर्शन नहीं, बल्कि विपरित परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का प्रेरणादायी संदेश देनेवाली साबित हुई. डॉ. मोनाली गवई की जिद, सकारात्मकता और सृजनशीलता समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रही है. कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन एड. विक्रांत गवई ने किया. दिन भर इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बडी संख्या में नागरिकों और कला प्रेमियों ने भेट दी.

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