ऑटो रिक्शा के नए परमिट पर रोक : सरकार को देर से आई समझ – नितीन मोहोड

अमरावती/दि.11 – महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऑटो रिक्शा के नए परमिट जारी करने पर रोक लगाने के निर्णय का विदर्भ ऑटो चालक फेडरेशन के संस्थापक नितीन मोहोड ने स्वागत किया है. उन्होंने इस फैसले को सरकार को देर से आई समझ करार दिया.
मोहोड ने जारी बयान में कहा कि करीब नौ वर्ष पहले रिक्शा निर्माता कंपनियों के साथ सांठगांठ कर पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर नए परमिट बांटे गए थे. राज्यभर में लगभग तीन लाख नए परमिट जारी किए गए थे. इससे पहले परमिट काले बाजार में साधारण स्टाम्प पेपर पर करीब 40 हजार रुपये में अवैध रूप से बेचे जाते थे. उन्होंने बताया कि अकेले अमरावती शहर में ही करीब 3 हजार नए परमिट जारी किए गए. यदि एक ऑटो रिक्शा की औसत कीमत डेढ़ लाख रुपये मानी जाए तो तीन लाख नए ऑटो रिक्शा बेचकर कंपनियों ने अरबों रुपये की कमाई की है.
मोहोड के अनुसार सरकार खुद रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रही थी, इसलिए अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए नए परमिट जारी किए गए, जिससे करीब तीन लाख लोगों को रोजगार मिलने का आभास हुआ. हालांकि इस प्रक्रिया में परमिटधारकों को भारी खर्च उठाना पड़ता था. परमिट की सरकारी फीस करीब 10 हजार रुपये, लाइसेंस बैच व अन्य खर्च 5 हजार रुपये तथा दलालों को 5 हजार रुपये देने पड़ते थे. इस तरह कुल लगभग 20 हजार रुपये का खर्च आता था. कई अभिभावक अपने बेरोजगार बेटों को काम दिलाने के लिए उधार, कर्ज या आभूषण गिरवी रखकर 60 से 70 हजार रुपये की व्यवस्था करते थे और निजी फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेकर ऑटो रिक्शा खरीदते थे. लेकिन शहर की सड़कें सीमित होने और पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं होने से ऑटो रिक्शा सड़क पर खड़े रहते हैं, जिससे पुलिस, दुकानदारों और अन्य वाहन चालकों के साथ विवाद की स्थिति भी बनती है.
मोहोड ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में आरटीओ अधिकारी, निजी फाइनेंस कंपनियां, बीमा कंपनियां और दलालों ने खूब लाभ कमाया. बड़ी संख्या में नए ऑटो आने से पहले से इस व्यवसाय पर निर्भर चालकों की आय पर भी असर पड़ा. इसलिए राज्य की कई ऑटो यूनियनों ने इसका विरोध किया था, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में करीब 12 लाख ऑटो चालक हैं. उनके संबंध में कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार को संबंधित संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उनका मत लेना चाहिए. मोहोड ने यह भी आरोप लगाया कि नए परमिट पाने वालों में स्थानीय मराठी चालकों की तुलना में अन्य राज्यों से आए लोगों की संख्या अधिक थी. इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए विदर्भ के पदाधिकारियों की बैठक जल्द ही बुलाई जाएगी.





