अब बढ रहे कपास के दाम
किसानों को लाभ पर संशय

* विदर्भ के अधिकांश उत्पादकों ने एमएसपी से कम पर बेची फसल
अमरावती /दि.4– विदर्भ के मार्केट में पखवाडे भर से कपास के दामों में तेजी दिखाई दे रही है. 8 हजार से 8 हजार 200 रेट प्रति क्विंटल मिल रहे है. किंतु मार्केट में कपास की आवक अब कुछ ही दिनों की है. वहीं यहां के किसानों को उसका विशेष लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा. जबकि जानकारों ने अंदाज जताया कि अगले कुछ दिनों तक कपास के रेट तेज रहेंगे. यह भी बताया गया कि कपास की सरकारी खरीद में विलंब होने से अधिकांश किसानों ने एमएसपी से कम रेट पर माल बेच दिया था.
विदर्भ में दिसंबर अंत में किसानों का लगभग 80 प्रतिशत कपास मार्केट में आ गया था. पैसे की नितांत आवश्यकता के कारण किसानों ने खुले मार्केट में कपास बेच दिया. सरकार की खरीदी विलंब से शुरू हुई. ऐसे में किसानों को मुश्किल से 6-7 हजार रूपए के रेट प्रति क्विटल माल के मिले. कुछ ही किसानों को 8 हजार के रेट प्राप्त होने की जानकारी मार्केट सूत्र दे रहे हैं. यह भी बताया गया कि दिसंबर तक कपास के रेट दबे हुए थे. तब किसानों ने मिले उस दाम पर माल बेच दिया.
कपास के दाम अस्थिर रहने से किसानों को घाटा सहन करना पडा. किंतु पिछले कुछ दिनों से रेट लगातार बढ रहे हैं. अब 8 हजार को पार कर जाने की जानकारी विदर्भ की मंडियों से मिल रही है. सीसीआई ने भी 7600- 8000 रूपए प्रति क्विंटल के रेट चुकाए है.
खाडी युध्द का परिणाम
किसानों को आगामी सीजन की चिंता शुरू हो गई है. कच्चे तेल का आयात कम होेने से पॉलिस्टर, नॉयलान और संबंधित अनैसर्गिक कपडा उद्योग दिक्कत में आ गया है. खाडी युध्द के कारण कपास के मार्केट सुधर रहे है. दाम बढ रहे हैं. डॉलर के मुकाबले रूपए की गिरती कीमत के कारण भी कपास मूल्य बढा है.
किसानों की चिंता बढी
कपास उत्पादक कृषकों की चिंता बढ रही है. क्योंकि भारत में 85% खाद की आपूर्ति, 20% कच्चा तेल आयात होता है. 40% डीएपी भी होरमुज खाडी से होकर आती है. ऐसे में खाडी युध्द की वजह से खाद और डीएपी के रेट बढने की पूरी संभावना बताई जा रही. फलस्वरूप किसानों की लागत बढनेवाली है. हालांकि अभी बुआई को दो माह का समय शेष है.





