सन 2019 के बाद पहली बार सबसे अलग-थलग व अकेले दिख रहे विधायक राणा

पहला चुनाव है जिसमें राणा के पास किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं

* वोट विभाजन के खतरे को ध्यान में रख भाजपा ने बनाई राणा से दूसरी
* भाजपा नेताओं ने ‘ना राणा, ना पाना’ का दिया सीधा व स्पष्ट संदेश
* मनपा चुनाव में भाजपा के साथ युति होने के बावजूद मनमानी करना पडा भारी
* भाजपा नेत्री नवनीत राणा की दोहरी भूमिका के चलते उपरी आदेश से ‘नट-बोल्ट’ कसना शुरु
* खुद सीएम फडणवीस ने वीडियो जारी कर साधा राणा दुष्प्रचार पर निशाना
अमरावती/दि.13 – वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र से किस्मत आजमाते हुए विधायक निर्वाचित हुए युवा स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष रवि राणा ने बडी तेजी के साथ अमरावती शहर सहित जिले की राजनीति में अपनी जगह तथा राज्यस्तर पर अपनी पहचान बनाई है. किसी समय कांग्रेस-राकांपा आघाडी की सरकार के साथ खडे दिखाई देनेवाले विधायक राणा वर्ष 2019 तक अपने तीनों चुनाव कांग्रेस, राकांपा व रिपाइं जैसे दलों के समर्थन से जीता था. वहीं 2019 के बाद वे भाजपा, विशेषकर देवेंद्र फडणवीस के बेहद नजदिकी हो गए थे. साथ ही विधायक राणा की पत्नी नवनीत राणा ने अमरावती संसदीय सीट से कांग्रेस-राकांपा का समर्थन हासिल कर निर्दलिय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल करने के बाद केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली सरकार का समर्थन करना शुरु कर दिया था. जिसके चलते राणा दंपति की भाजपा के साथ घनिष्ठता और भी अधिक बढ गई थी. लेकिन इसके बावजूद इस समय मनपा चुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच विगत 5-6 दिनों के दौरान कुछ ऐसे हालात बने कि, भाजपा ने एक तरह से राणा दंपति को किनारे कर दिया है. जिसके चलते इस समय विधायक रवि राणा और उनकी युवा स्वाभिमान पार्टी पूरी तरह से अलग-थलग व अकेले दिखाई दे रहे है.
बता दें कि, केंद्र में एनडीए व राज्य में महायुति का घटक दल रहनेवाली युवा स्वाभिमान पार्टी को भाजपा ने अमरावती मनपा के चुनाव के लिए भी अपने साथ युति में शामिल किया था और युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए 6 सीटें भी छोडी थी. परंतु उन 6 सीटों के अलावा विधायक रवि राणा ने अन्य 30 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशी खडे कर दिए. साथ ही साथ विधायक राणा की पत्नी व पूर्व सांसद नवनीत राणा ने खुद भाजपा में रहने के बावजूद कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों का प्रचार करने की बजाए युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशियों का प्रचार करना शुरु किया था. इसके अलावा विधायक राणा द्वारा अपने कई प्रत्याशियों को एक तरह से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर प्रचारित करते हुए यहां तक कहा जा रहा है कि, चुनाव जीतने के बाद वह प्रत्याशी भाजपा में ही शामिल हो जाएगा. इन तमाम बातों से कहीं न कहीं मनपा के चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचता दिखाई दे रहा था. साथ ही राणा दंपति की इन हरकतों के चलते स्थानीय भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं में भी काफी हद तक नाराजगी व असंतोष की स्थिति बन रही थी. जिसकी वजह से पूरा मामला असमंजस वाला बना हुआ था. संभवत: यही वजह रही कि, भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेना शुरु किया और स्थिति पर विचार-विमर्श के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए. जिसके चलते विगत 3-4 दिनों से भाजपा नेताओं द्वारा अप्रत्यक्ष रुप से राणा दंपति के पर कतरने शुरु किए गए है. जिसके तहत सबसे पहले मनपा चुनाव में खडे भाजपा प्रत्याशियों के प्रचार हेतु एक सभा को संबोधित करते हुए पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने एक तरह से युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ युति तोडने का ऐलान करते हुए प्रभाग क्र. 9 में युति के तहत युवा स्वाभिमान पार्टी हेतु छोडी गई दो सीटों पर दो निर्दलिय प्रत्याशियों को समर्थन देने की घोषणा की थी और इसी बात को अन्य प्रभागों में भी भाजपा नेताओं द्वारा दोहराया गया.
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि, गत रोज जहां एक ओर भाजपा नेता व मंत्री आकाश फुंडकर ने ‘ना राणा, ना पाना’ की बात कही. वहीं अमरावती दौरे पर पहुंचे विधायक नीतेश राणे ने राणा के ‘पाना’ से राणा के ही ‘नट-बोल्ट’ कसने की बात कही और भाजपा के ‘ओरिजनल’ प्रत्याशियों को विजयी बनाने का आवाहन करते हुए विधायक राणा के प्रत्याशियों को ‘चायनीज’ यानि ‘डुप्लिकेट’ माल बताया. साथ ही साथ ध्यान देनेवाली बात यह भी रही कि, अब तक लगभग सभी महत्वपूर्ण मौकों पर भाजपा नेताओं के साथ मंच पर दिखाई देनेवाली पूर्व सांसद नवनीत राणा ने जहां पहले खुद को मनपा चुनाव को लेकर जारी जद्दोजहद से दूर रखना शुरु किया था और फिर वे धीरे-धीरे पालकमंत्री बावनकुले की सभाओं में कभी-कभार दिखाई देनी शुरु हुई थी. वहीं अब संभवत: भाजपा ने ही पूर्व सांसद नवनीत राणा को अपने प्रचार अभियान से दूर कर दिया है. यही वजह रही कि, वे गत रोज अपनी ही तरह ‘फायरब्रांड’ नेता व ‘स्टार प्रचारक’ रहनेवाले विधायक नीतेश राणे की दोनों में से एक भी सभा में दिखाई नहीं दी. वहीं विधायक राणे ने अपनी दोनों प्रचार सभाओं में राणा दंपति को लेकर जबरदस्त निशाना साधा. ऐसे में अब इस बात को लेकर सुगबुगाहट शुरु हो गई है कि, संभवत: भाजपा द्वारा आए दिन होनेवाली झंझट और किच-किच से बचने के लिए अब राणा दंपति को हाशिए पर डालकर उनसे अपना पल्ला झाड लिया गया है. इसके चलते अब तक हमेशा ही किसी न किसी बडे राजनीतिक दल की छांव लेकर चलनेवाले विधायक रवि राणा पहली बार राजनीतिक मैदान में निपट अकेले खडे दिखाई दे रहे है.

Back to top button