6 माह में राजकमल रेलवे पुल शुरु नहीं कराया, तो नाम बदल देना
मनपा के स्वीकृत पार्षद दिनेश बूब ने भरी हुंकार

* पंचवार्षिक कार्यकाल की प्राथमिकताएं तय रहने की बात कही
* स्वीकृत पार्षद बनने के बाद दैनिक ‘अमरावती मंडल’ को दिया विशेष साक्षात्कार
अमरावती /दि.23 – विगत करीब 6 माह से बंद पडे राजकमल रेलवे फ्लाईओवर का मामला यदि अमरावती महानगर पालिका ने राज्य सरकार से अपने पास लेती है और इसका जिम्मा मुझे सौंपा जाता है, तो मैं किसी भी स्थिति में अगले 6 माह के भीतर राजकमल रेलवे उडानपुल को दुबारा शुरु करके दिखा सकता हूं. साथ ही यदि इस दौरान जानोमाल का कोई नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई के लिए मैं अपनी ‘प्रॉपर्टी अटैच’ कने के लिए भी पूरी तरह तैयार हूं. यदि मैं ऐसा नहीं कर पाया, तो नाम का दिनेश बूब नहीं, इस आशय की हुंकार मनपा के नवनियुक्त स्वीकृत पार्षद दिनेश बूब द्वारा भरी गई. साथ ही उन्होंने प्रशासकराज के दौरान अमरावती शहर का जमकर सत्यानाश होने की बात कहते हुए आगामी समय में प्रशासन से कई बातों को लेकर जवाब-तलब करने की भी बात कही.
विगत शुक्रवार 20 फरवरी को हुई अमरावती मनपा के मौजूदा सदन की पहली आमसभा में महानगर पालिका के स्वीकृत पार्षद चुने गए दिनेश बूब से उनकी नियुक्ति के उपरांत दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने विशेष साक्षात्कार लेते हुए उनके भावी कार्यकाल की प्राथमिकताओं के बारे में जानना चाहा. इस समय स्वीकृत पार्षद दिनेश बूब ने कहा कि, अमरावती शहर में ऐसे कई मामले और मुद्दे है, जो अपने-आप में बेहद जटील रहने के साथ ही लंबे समय से प्रलंबित है. जिन्हें हल करना प्रशासन के भी बस की बात नहीं है. ऐसे सभी जटील मामलों को मनपा प्रशासन ने उनके हवाले कर देना चाहिए. जिन्हें वे अपने हिसाब से हल करने का माद्दा रखते है. साथ ही उन्हें उन मुद्दों के हल होने का श्रेय भी नहीं चाहिए, बल्कि सदन के पीठासीन सभापति व मनपा के अधिकारी उन सभी कामों का श्रेय लेने के लिए स्वतंत्र रहेंगे. स्वीकृत पार्षद दिनेश बूब के मुताबिक अमरावती शहर में हॉकर्स जोन, सडकों पर दुकानदारों एवं घुमंतूओं के अतिक्रमण तथा गली-मोहल्लो में आवारा कुत्तों की समस्या विगत लंबे समय से शहरवासियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है. इसके साथ ही वडाली तालाब व बगीचे के सौंदर्यीकरण एवं वहां पर हिंदू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के स्मृति स्मारक के निर्माण का काम भी लंबे समय से प्रलंबित है. इन सभी कामों की ओर ध्यान देना और उन्हें पूरा करवाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है. इसके अलावा उन्हें सदन द्वारा जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसे पूरा करने का वे अपनी ओर से भरसक प्रयास करेंगे.
इस बातचीत में स्वीकृत पार्षद दिनेश बूब ने इस बात को लेकर मनपा प्रशासन के खिलाफ अपनी जबरदस्त नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि, मनपा की शालाओं का शैक्षणिक स्तर उंचा उठाने के लिहाज से उन्होंने अपने विगत कार्यकाल के दौरान अपनी तरह की एक शानदार पहल की थी. जिसके तहत तखतमल श्रीवल्लभ चैरिटेबल ट्रस्ट, माहेश्वरी शिक्षा संस्था तथा होलीक्रास-ज्ञानमाता जैसी नामांकित शिक्षा संस्थाओं को मनपा के शिक्षा विभाग के साथ जोडा गया था और इन शिक्षा संस्थाओं को मनपा की कई शालाएं दत्तक दी गई थी. जहां पर इन शिक्षा संस्थाओं ने अपनी जेब से पैसा खर्च करते हुए मूलभूत शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही अपने पास दत्तक रहनेवाली मनपा शालाओं की शैक्षणिक गुणवत्ता के स्तर को उंचा उठाने का प्रयास किया था. उस समय यह अपेक्षित था कि, मनपा प्रशासन द्वारा इन शिक्षा संस्थाओं के प्रति कृतज्ञ रहते हुए उन्हें हर तरह का सहयोग प्रदान किया जाए. परंतु ऐसा करने की बजाए प्रशासकराज के दौरान मनपा प्रशासन ने उन नामांकित शिक्षा संस्थाओं को कुछ हद तक प्रताडित करने का ही काम किया. जिसकी वजह से धीरे-धीरे उन शिक्षा संस्थाओं ने उस काम से अपना हाथ खींच लिया. जिसका सीधा नुकसान मनपा शालाओं में पढनेवाले सर्वहारा वर्ग के छात्र-छात्राओं को उठाना पड रहा है. इस बात से उन्हें काफी अधिक पीडा पहुंची है. जिसे लेकर वे बहुत जल्द आमसभा में आवाज उठाने के साथ ही इस मुद्दे पर चर्चा करने हेतु विशेष बैठक भी बुलवाएंगे.





