कर्जदार ने किश्त नहीं चुकाई तो गारंटर से होगी सीधी वसूली

गारंटी देने से पहले नियम-शर्तें समझना जरूरी

* सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिम्मेदारी बढ़ी
अमरावती /दि.13 – किसी व्यक्ति के कर्ज के लिए गारंटर बनना केवल औपचारिकता नहीं बल्कि बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि कर्ज लेने वाला व्यक्ति समय पर किश्तों का भुगतान नहीं करता, तो बैंक सीधे गारंटर से भी पूरी राशि की वसूली कर सकता है. इसलिए किसी के लिए गारंटी देने से पहले सभी दस्तावेज, नियम और संभावित जोखिमों को समझना बेहद जरूरी है.
वित्तीय सलाहकार स्वप्निल मोहोड के अनुसार कर्ज लेनदेन में अक्सर रिश्तेदार, मित्र या परिचित को गारंटर बनने का अनुरोध किया जाता है. लेकिन यदि उधारकर्ता भुगतान करने में असमर्थ रहता है तो बैंक वसूली के लिए गारंटर से संपर्क कर सकता है. ऐसे में गारंटर को भी कर्ज चुकाने की कानूनी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक कर्ज स्वीकृत करते समय उधारकर्ता और गारंटर दोनों की सहमति लेता है. इसलिए गारंटर बनने से पहले ऋण की राशि, अवधि, ब्याज दर और चुकौती की शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक है. कानूनी प्रावधानों के अनुसार यदि कर्ज की अदायगी नहीं होती तो बैंक गारंटर की संपत्ति जब्त कर सकता है, बैंक खाते से रकम वसूल सकता है या उनके नाम की अचल संपत्ति पर भी दावा कर सकता है.

* गारंटर बनने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
– ऋण समझौते की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें
– उधारकर्ता की आर्थिक स्थिति और चुकाने की क्षमता जांचें
– ऋण राशि, अवधि और जोखिमों को समझें
– बिना जानकारी के किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें
– गारंटर बनने के बाद नाम वापस लेना आसान नहीं होता

* मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती जिम्मेदारी
यदि मूल कर्जदार की मृत्यु हो जाए तो भी गारंटर की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती. ऐसी स्थिति में यदि कर्जदार के वारिस ऋण नहीं चुकाते, तो बैंक गारंटर को कानूनी नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया शुरू कर सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी के कर्ज के लिए गारंटर बनने का मतलब है वित्तीय जिम्मेदारी स्वीकार करना, इसलिए पूरी जानकारी और सोच-समझकर ही ऐसा निर्णय लेना चाहिए.

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