चिखलदरा की 600 आदिवासी महिलाओं के साथ अन्याय?
60 बचत समूहों का 60 लाख रुपयों का फंड रोका!

* पालकमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जगी उम्मीद
चिखलदरा/दि. 30 – मेलघाट के दुर्गम चिखलदरा क्षेत्र की करीब 600 आदिवासी महिलाओं के साथ कथित तौर पर बड़ा अन्याय सामने आया है. लघु उद्योग शुरू करने के लिए घोषित 60 लाख रुपये की सहायता राशि (60 बचत समूह) को जिला नियोजन विभाग द्वारा रोक दिए जाने से महिलाएं हताश हो गई थीं. हालांकि अब पालकमंत्री के हस्तक्षेप के बाद न्याय की उम्मीद जगी है.
दरअसल, जिला वार्षिक योजना के तहत पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रत्येक महिला बचत समूह को 1 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी. इस संबंध में विधायक केवलराम काले ने 12 सितंबर 2025 को जिला नियोजन विभाग को प्रस्ताव भी भेजा था. इसके बावजूद, नियोजन समिति ने मेलघाट के अनुसूचित जाति एवं जनजाति के 60 बचत समूहों को योजना से बाहर रखा. दूसरी ओर, महिला आर्थिक विकास महामंडल के तहत 407 स्वयं सहायता समूहों को 6 करोड़ 36 लाख 15 हजार रुपये की राशि मंजूर कर दी गई.
* ग्रामीण महिलाओं की अनदेखी, शहरी क्षेत्रों को प्राथमिकता?
आरोप है कि दुर्गम, डोंगरी और आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं को नजरअंदाज कर अपेक्षाकृत प्रभावशाली और शहरी क्षेत्रों के समूहों को लाभ पहुंचाया गया. इससे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों को झटका लगा है.
* पालकमंत्री के दौरे में महिलाओं का आक्रोश
17 मार्च को अमरावती दौरे पर पहुंचे पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को घेरकर चिखलदरा की महिलाओं ने अपनी पीड़ा बताई. महिलाओं की शिकायत सुनते ही पालकमंत्री बावनकुले ने तत्काल नियोजन विभाग को प्रस्ताव मंजूर करने के निर्देश दिए और आवेदन पर स्वयं हस्ताक्षर किए.
* नगराध्यक्ष अब्दुलभाई की पहल रंग लाई
इस पूरे मामले में नगराध्यक्ष अब्दुलभाई की भूमिका अहम रही. उन्होंने नगर परिषद में प्रस्ताव पारित कर लगातार इस मुद्दे को उठाया और महिलाओं के समर्थन में खड़े रहे. उनकी पहल से ही मामला पालकमंत्री तक पहुंचा.
* अब न्याय की उम्मीद
पालकमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब चिखलदरा की 600 महिलाओं को रुका हुआ फंड मिलने की उम्मीद है. यदि निधि जारी होती है, तो ये महिलाएं लघु उद्योग शुरू कर आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है.





