नेवर से डाय, समस्याओं को बनाओ सफलता की डगर

जनरल मनोज पांडे का विद्यार्थियों से आवाहन

* संत गाडगे बाबा अमरावती विवि का 42 वां दीक्षांत समारोह
* 42173 विद्यार्थी उपाधि से अलंकृत
अमरावती/ दि. 23 – समस्याओं से, बाधाओं से कतई न घबराते हुए, अपने लक्ष्य से न डिगते हुए नेवर से डाय धारणा को अपनाने और समस्याओं को सफलता की डगर बनाने का आवाहन पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने आज किया. वे संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के 42 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य संबोधन, मार्गदर्शन कर रहे थे. अध्यक्षता कुलगुरू डॉ. मिलिंद बारहाते ने की. वहीं मंच पर प्र-कुलगुरू डॉ. महेंद्र ढोरे विद्यापीठ व्यवस्थापन परिषद के सभी सदस्य, सभी विभागों के डीन और मान्यवर विराजमान थे.
जनरल पांडे ने विद्यार्थियों से सीधा सहज संवाद करते हुए कह दिया कि वे ही विकसित भारत के कर्ता धर्ता बन सकते हैं. इसलिए उन्हें पूर्ण जिम्मेदारी, ईमानदारी और निष्ठा से अपने कर्तव्य पूर्ण करने होंगे. सेना प्रमुख रहे मनोज पांडे अपने नपे तुले हिन्दी और अंग्रेजी संबोधन में बहुत ही सहज रहे. उनकी यह सहजता दीक्षांत समारोह के प्रत्येक छात्र- छात्रा को कदाचित प्रभावित कर गई. जनरल पांडे ने कहा कि जीवन में कई बार परीक्षा की घडी आयेगी. हमारे लक्ष्य में बाधाएं आयेंगी. असफलता भी कदचित हमारी राह रोकेगी. किंतु हमें असफलता को अवसर में बदलना होगा. तभी हम आदर्श, मॉडल बनेगे. अच्छे उदाहरण बनना निश्चित ही सरल नहीं है. त्याग, बलिदान, निरंतरता को अपनाते हुए ईमानदार प्रयासों पर डटे रहना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य रहेगा.
जनरल पांडे ने लगभग 15 मिनिट के प्रभावशाली संबोधन में उपस्थित विद्यार्थियों, प्राध्यापक, अभिभावकों से जीवन में नेवर से डाय रूख सदैव रखने का आवाहन किया. उन्होंने अमरावती विद्यापीठ की अनेकानेक गतिविधियों, विविध क्षेत्रों में उपलब्धियों का गौरव कर कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अमरावती का नाम देशभर में हो, इसके लिए भी प्रयत्न होने चाहिए. अपने संबोधन के आरंभ में ही जनरल पांडे ने संत गाडगेबाबा के प्रति अत्यंत आदर व्यक्त किया और कहा कि सामाजिक न्याय, स्वच्छता, निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को आत्मसात करनेवाले गाडगेबाबा आज सरलता, करूणा के अटल उदाहरण है. उनके नाम के इस विश्वविद्यालय का देश और समाज के प्रति दायित्व बढ जाता है.
सेना प्रमुख रहे जनरल पांडे ने विदर्भ क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक बातों का भी उल्लेख कर विद्यापीठ से आज के दौर के उद्यम के अनुरूप कोर्सेस गढने और क्षेत्र में इको सिस्टम डेवलप करने का आवाहन किया. उन्होंने कहा कि आज विविध क्षेत्र चुनौतियों से परिपूर्ण है. किंतु आगे वहीं बढता है, सफल होता है जो चुनौतियों का डटकर मुकाबला करता है. उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को उनके शानदार अंकों के लिए पुरस्कृत करते समय भी सेवानिवृत्त जनरल मनोज पांडे ने सभी से व्यक्तिगत, स्वाभाविक संवाद किया. उनका यह संवाद छात्र- छात्राओं को बडा अच्छा लगने का दृश्य था.
सभी स्नातक कोर्सेस में एआई विषय
कुलगुरू डॉ. मिलिंद बारहाते ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में ऐलान कर दिया कि विद्यापीठ ने सभी स्नातक अभ्यासक्रम में इसी वर्ष से कृत्रिम बुध्दिमत्ता एआई का विषय अनिवार्य कर दिया है. यह विषय विद्यार्थियों को एआई की चुनौतियों से निपटने का बल देगा और उनका एआई के प्रति भय दूर करेगा. कुलगुरू ने कहा कि एआई से घबराने की आवश्यकता नहीं है. बल्कि एआई का नया कौशल आत्मसात करने से रोजगार के अवसर बढने वाले हैं. कुलगुरू ने विद्यार्थियों और उपस्थितों को स्मरण कराया कि पहले पहल संगणक आने पर भी इसी प्रकार की भययुक्त बातें की गई थी. आज भारत में संगणकीकरण में विश्व में लौकिक प्राप्त किया है. भारत के साफ्टवेयर इंजीनियर दुनिया पर छा गये हैं. डॉ. बारहाते ने कहा कि एआई से आए संभावित बदलाव और कौशल को विचारपूर्वक आत्मसात करने की आवश्यकता है. अपनी संपूर्ण उर्जा का उपयोग करते हुए एआई सीख लिया तो रोजगार के नये दालन खुलने लगेंगे. नई कल्पना से हम शिखर पर पहुंच सकते हैं. कुलगुरू ने शिक्षा के साथ साथ खेल और सामाजिक क्षेत्र में भी अमरावती विद्यापीठ के विद्यार्थियों की नेत्रदीपक सफलता का गौरवपूर्ण विवरण समारोह को दिया.

* कमलताई गवई डीलिट से अलंकृत
डॉ. कमलताई रामकृष्ण गवई को अमरावती विवि ने मानद डीलिट उपाधि से अलंकृत किया. रिटायर्ड जनरल मनोज पांडे, कुलगुरू डॉ. मिलिंद बारहाते के हस्ते कमलताई को मानद डीलिट से सम्मानित किए जाते ही समस्त सभागार तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा था. मंच पर कमलताई के साथ उनकी पुत्री कीर्ति अर्जुन भी पधारी थी. मंच से उतरते समय स्वयं कुलगुरू और शिवाजी शिक्षा संस्था के अध्यक्ष भैया साहब देशमुख ने कमलताई को सहारा दिया. विद्यापीठ द्बारा यह केवल तीसरी मानद डीलिट पदवी प्रदान की गई है. इसके पहले प्रख्यात पार्श्व गायिका आशा भोसले, समाजसेवी पद्मश्री शंकर बाबा पापलकर को मानद डीलिट उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है.

पूर्व सीजेआई पधारे और फोटो सेशन
डॉ. कमलताई गवई के बडे पुत्र तथा देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश जस्टिस भूषण गवई का दीक्षांत समारोह में आगमन होने पर विद्यापीठ ने शब्द सुमनों से स्वागत किया. जबकि अपनी माता जी कमलताई के साथ जस्टिस भूषण गवई, भ्राता डॉ. राजेंद्र गवई, बहन कीर्ति अर्जुन, चाचा वसंतराव गवई और अन्य परिचितों के संग उन्होंने हंसी खुशी फोटो खिंचवाए, पोज दिए. विद्यापीठ के पदाधिकारियों के सभा मंडप से प्रस्थान करने पर परंपरा और रिवाज के अनुसार समस्त सभागार के साथ जस्टिस भूषण गवई भी खडे रहे और सभी का अपनी सहज मुस्कान से दिल जीत ले गये.
झलकियां
– कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रगीत से हुआ, समापन पसायदान से किया गया.
– मुख्य अतिथि जनरल मनोज पांडे ने प्रत्येक पुरस्कार प्राप्त विद्यार्थियों से कुछ न कुछ बात अवश्य की. उनका नाम, गांव और माता-पिता के विषय में पूछा.
– गोल्ड मेडल, सिल्वर मेडल जीतने वाले कई विद्यार्थियों ने मनोज पांडे और कुलगुरू के पांव पडे. पूर्व सेना प्रमुख ने हाथों से आशीर्वाद दिए.
– 6 गोल्ड मेडल जीतनेवाली नेर की निकिता पुनसे से कुलगुरू और जनरल पांडे ने सहज संवाद किया. निकिता ने दोनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया.

* आज ही डिजी लॉकर में डिग्री
कुलगुरू डॉ. मिलिंद बारहाते की एक घोषणा ने समस्त सभागार को आनंदित कर दिया. उन्होंने सदन को बताया कि आज विद्यापीठ द्बारा जो हजारों डिग्रीयां प्रदान की जा रही है. वे शाम तक डिजी लॉकर में उपलब्ध होगी, ऐसी व्यवस्था विद्यापीठ ने की है. उन्होंने सदन को बताया कि पिछले एक वर्ष ेमें विद्यापीठ ने 12 करोड के भवन निर्माण और सुविधाएं करने के के कार्य किए है. जिसमें आदिवासी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास का समावेश हैं. दीक्षांत समारोह का वेबसाइट और यू ट्यूब पर विद्यापीठ चैनल से सीधा प्रसारण किया गया था. जिसका हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों ने घर बैठे लाभ लिया.

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