जितनी उगल सकते थे, उतनी आग उगलकर गए नीतेश राणे
प्रचार के अंतिम दौर में ‘पोलरायजेशन’ की सीमा हुई पार

* राणे के भाषण में विकास से ज्यादा हिंदुत्व का मुद्दा ही छाया रहा
* हिंदुत्व की आड लेकर धार्मिक भावनाओं को भडकाने का किया काम
* पूरे भाषण में कई आपत्तिजनक व विवादास्पद शब्दों की रही भरमार
* अब सभी की निगाहें पुलिस की संभावित कार्रवाई पर टिकी
* खुलेआम होता दिखाई दिया आदर्श आचार संहिता के निर्देशों का हनन
अमरावती/दि.13 – मनपा चुनाव में खडे भाजपा प्रत्याशियों का प्रचार करने हेतु गत रोज भाजपा के ‘स्टार प्रचारक’ व ‘फायरब्रांड’ नेता रहनेवाले विधायक नीतेश राणे ने अमरावती आकर दो स्थानों पर प्रचार सभाएं की और हिंदुत्व की आड लेकर दोनों प्रचार सभाओं में जितनी संभव हो सकती थी, उतनी आग विधायक राणे द्वारा उगली गई. साथ ही विधायक राणे ने अपने भाषण में विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ समुदाय विशेष को भी खुलेआम तरीके से निशाना बनाया और कई आपत्तिजनक व विवादास्पद जुमलों का भी प्रयोग किया. जिसे साफ तौर पर आदर्श आचार संहिता के नियमों व मानकों का उल्लंघन माना जा सकता है. ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई है कि, आखिर अब इस मामले का स्वसंज्ञान लेकर जिला प्रशासन व शहर पुलिस द्वारा कौनसे कदम उठाए जाते है.
उल्लेखनीय है कि, चुनाव प्रचार के दौरान राजनेताओं द्वारा अपने प्रतिस्पर्धी दलों व प्रत्याशियों पर निशाना साधना और राजनीतिक तंज कसना बेहद आम बात है. परंतु ऐसा करते समय उन्हें शब्दों की गरीमा व मर्यादा का भी भान रखना होता है. परंतु विगत डेढ-दो दशकों के दौरान राजनीतिक मंचों पर भाषा का स्तर काफी हद तक नीचे गिर चुका है और अब राजनीतिक तंज का स्थान व्यक्तिगत टिका-टिप्पणी ने ले लिया है. जिसके तहत कई बार राजनेताओं द्वारा प्रतिस्पर्धियों का चरित्र हनन करने का प्रयास करने के साथ-साथ वोटों का ध्रुविकरण करने हेतु जातिय एवं धार्मिक भावनाओं को उकसाने का भी काम किया जाता है. साथ ही ऐसा करनेवाले नेताओं को इन दिनों ‘फायरब्रांड’ नेता का दर्जा भी अपने-आप ही मिल जाता है. यही वजह रही कि, भाजपा में ‘फायरब्रांड’ नेता का दर्जा हासिल रखनेवाले विधायक नीतेश राणे ने गत रोज अमरावती आकर दो प्रचार सभाओं में जमकर आग उगलने के साथ ही समुदाय विशेष को निशाना बनाते हुए एक तरह से वोटों के ध्रुविकरण का ही प्रयास किया. ऐसे में कहा जा सकता है कि, मनपा जैसे स्थानीय निकाय के चुनाव हेतु आयोजित विधायक राणे की दोनों सभाओं और दोनों स्थानों पर दिए गए उनके भाषणों में संबंधित प्रभागों सहित अमरावती शहर के विकास का मुद्दा लगभग नदारद रहा, बल्कि इसकी बजाए हिंदु समजा के लिए एक समुदाय विशेष के रहनेवाले खतरों के उल्लेख की भरमार अधिक रही.
अमरावती में आयोजित दो प्रचार सभाओं में भाजपा नेता व विधायक नीतेश राणे ने अमरावती शहर में अरसा पहले घटित कुछ घटनाओं का उल्लेख करने के साथ ही हाल-फिलहाल ही अमरावती के दौरे पर आए एमआईएम पार्टी के मुखिया व सांसद असदउद्दीन ओवैसी द्वारा दिए गए भाषण का हवाला देते हुए अपनी प्रचार सभाओं में मौजूद लोगों में एक तरह से धार्मिक उन्माद पैदा करने का काम किया तथा समुदाय विशेष के लिए कई आपत्तिजनक विशेषणों का प्रयोग भी किया. जिसे सीधे तौर पर चुनावी आचार संहिता के निर्देशों का उल्लंघन माना जा सकता है. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि, इस बात का स्वसंज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन, शहर पुलिस व निर्वाचन विभाग द्वारा अपने स्तर पर विधायक नीतेश राणे के खिलाफ कार्रवाई करने हेतु कौनसे कदम उठाए जाते है.





