अलिम्को माप शिविर में दिव्यांग विद्यार्थियों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद
147 विद्यार्थियों की जांच, 238 सहायक उपकरणों के लिए लिया गया माप

विश्व दिव्यांग सप्ताह में होगा वितरण
अमरावती/दि.6 – अमरावती मनपा की ओर से सेवा संकल्प अभियान के तहत समग्र शिक्षा के माध्यम से 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सोमवार, 5 अक्टूबर को अलिम्को माप शिविर का आयोजन किया गया. रुक्मिणी नगर स्थित मनपा मराठी प्राथमिक शाला क्रमांक 19 में आयोजित इस शिविर को दिव्यांग विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला.
अलिम्को संस्था के विशेषज्ञ दल की ओर से आयोजित इस मेजरमेंट कैंप में अस्थिव्यंग, सेरेब्रल पाल्सी (सी.पी.), बहुविकलांग, कर्णबधिर तथा अल्पदृष्टि श्रेणी के विद्यार्थियों की जांच की गई. मनपा क्षेत्र के कुल 147 दिव्यांग विद्यार्थियों का आवश्यक साहित्य, साधन एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए माप लिया गया. इन विद्यार्थियों को कुल 238 सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाने हैं. शिविर की अध्यक्षता मनपा की अतिरिक्त आयुक्त शिल्पा नाईक ने की. प्रमुख अतिथि के रूप में उपायुक्त नरेंद्र वानखड़े तथा शिक्षाधिकारी डॉ. प्रकाश मेश्राम उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन कैलास कुलट ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन उज्ज्वल जाधव ने किया. इस अवसर पर उपायुक्त नरेंद्र वानखड़े ने कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना और उनके लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना पुण्य का कार्य है. उन्होंने कहा कि समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए.
अध्यक्षीय संबोधन में अतिरिक्त आयुक्त शिल्पा नाईक ने सभी अभिभावकों से ऐसे शिविरों का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया. उन्होंने बताया कि पात्र विद्यार्थियों को विश्व दिव्यांग सप्ताह के अवसर पर आवश्यक साहित्य एवं सहायक उपकरणों का वितरण किया जाएगा. साथ ही भविष्य में दिव्यांग विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर महानगरपालिका प्रशासन उनके साथ खड़ा रहेगा, ऐसा आश्वासन भी उन्होंने दिया. शिविर को सफल बनाने के लिए संजय बेलसरे, योगेश राणे, विषय विशेषज्ञ शुभांगी सुने, अतुल बोबडे, सोनिया पवार, वैशाली सोलंके, विशाल वालचाळे, सुमेश वानखड़े, पूनम कनेर, भारती मालखेड़े, दीपाली थोरात, कुमुदिनी देवळे, प्रतिभा नागपुरे तथा विशेष शिक्षक गिरीश लाकड़े सहित विशेष शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं ने परिश्रम किया.





