फर्जी बैंक गारंटी प्रकरण में मुंबई समेत दिल्ली और गुजरात में छापे

महाविरतण कंपनी को 122.85 करोड का लगाया चुना

मुंबई/दि.24 महावितरण कंपनी को 122.84 करोड रुपए का चुना लगानेवाले चार निजी कंपनियों के कार्यालय और संचालक के निवासस्थान पर आर्थिक अपराध शाखा ने छापे मारकर कागजपत्र व डिजिटल सबुत जब्त किए हैं. मुंबई, ठाणे समेत दिल्ली, गुजरात और मध्यप्रदेश में छापे मारकर सर्चिंग की गई. जब्त सबूतों की सहायता से आगे की जांच शुरू है. आर्थिक अपराध शाखा द्बारा दी गई जानकारी के मुताबिक 21 फरवरी को यह कार्रवाई की गई.
सौर उर्जा प्रकल्प 2.0 योजना की निविदा प्रक्रिया में शामिल होते हुए चार निजी कंपनियों ने महावितरण के पास फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत कर बिजली खरीदी करार किया. इसमें कुल 122.85 करोड रुपए की जालसाजी किए जाने का आरोप हैं. इस प्रकरण में महावितरण की तरफ से मेसर्स नॅकॉफ उर्जा प्राइव्हेट लिमिटेड, मेसर्स एनओपीएल प्रोजेक्टस प्रा.लि., मेसर्स इंटिग्रेशन इंडक्शन पॉवर लिमिटेड, मेसर्स आयआयपीएल हिंगोली प्रा.लि. मेसर्स आयआयपीएल परभणी प्रा.लि., मेसर्स नॅकॉफ उर्जा प्राइव्हेट लिमिटेड, मेसर्स एनओपीएल पेस ग्रीन एनर्जी प्रा.लि. , मेसर्स ओनिक्स रिन्युएबल लि., मेसर्स ओनिक्स आयपीपी लि. नामक कंपनियों के विरोध में आर्थिक अपराध शाखा के पास शिकायत की गई. यह कंपनी और उनके संचालकों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा ने 20 फरवरी को निर्मल नगर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की. नेकॉफ ने 48 करोड रुपए, इंटिग्रेशन में 13 करोड, पीस ग्रीन एनर्जी 150.50 करोड और ओनिक्स में 11.25 करोड रुपए की फर्जी बैंक गारंटी का समावेश था. 21 फरवरी को मुंबई, ठाणे, नई दिल्ली, मध्यप्रदेश के इंदौर शहर, गुजरात के अहमदाबाद और राजकोट शहर में कंपनी के कार्यालय और आरोपियों के निवासस्थान पर छापे मारकर तलाशी ली गई. इस प्रकार करीबन 100 करोड रुपए की फर्जी बैंक गारंटी देनेवाली एक अन्य कंपनी के खिलाफ भी गत माह मामला दर्ज किया गया हैं. उसकी भी जांच आर्थिक अपराध शाखा की तरफ से शुरू हैं. इस कारण कुल आंकडा 222.84 करोड रुपए तक पहुंच गया है. इन प्रकरणों में कंपनियों को व्यक्तिगत लाभ के लिए सहयोग करनेवाले महावितरण के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल जांच के घेरे में हैं.

 

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