रास्ते के कामों हेतु नैसर्गिक जलस्त्रोतों के पानी के प्रयोग पर लगे प्रतिबंध

पूर्व राज्यमंत्री प्रवीण पोटे पाटिल ने उठाई मांग

अमरावती /दि.6– राज्य में शुरु रहनेवाले सडकों के खडीकरण, नैशनल हाईवे, स्टेट हाईवे व ग्रामीण कांक्रीट रास्तों की क्युरिंग कामों हेतु नैसर्गिक जलस्त्रोतों से मिलनेवाले साफ पानी की बजाए घरों से निकलने वाले गंदे पानी व नालों में बहनेवाले पानी का प्रयोग किया जाना चाहिए. ताकि नैसर्गिक जलस्त्रोतों में जलस्तर व जलसंग्रहण की स्थिति बनी रहे अन्यथा भविष्य में भीषण जल किल्लत पैदा होने का खतरा रहेगा. इस बात को ध्यान में रखते हुए रास्तों के काम हेतु खदानों में जमा रहनेवाले पानी अथवा वेस्ट वॉटर के प्रयोग की ही अनिवार्यता रखी जाए और इसे लेकर शासन निर्णय जारी करते हुए रास्तों के कामों हेतु नैसर्गिक जलस्त्रोतों के पानी के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए, इस आशय की मांग पूर्व राज्यमंत्री प्रवीण पोटे पाटिल द्वारा की गई है.
पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित सार्वजनिक लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले व सचिव मिलिंद म्हैसकर को निवेदन सौंपते हुए बताया कि, क्युरिंग प्रक्रिया में लाखों लीटर पानी खेतों के कुओं अथवा नैसर्गिक जलस्त्रोतों से लिया जाता है. जिसके चलते ऐसे जलस्त्रोतों में जमा रहनेवाले पानी के संग्रहण की नाहक ही बर्बादी होती है, साथ ही जलस्त्रोतों में जलस्तर भी तेजी के साथ घटता है. जिससे भविष्य में जल किल्लत पैदा हो सकती है.

* पर्यायी पानी का हो प्रयोग
पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल द्वारा निवेदन में कहा गया कि, प्राकृतिक जलसंपदा को बचाने हेतु सडकों के निर्माण वाले स्थानों के आसपास खदानों के गड्ढों में जमा रहनेवाले बारिश के पानी, नाले से बहनेवाले पानी तथा प्रक्रिया किए गए मलजल का प्रयोग करने से संबंधित आदेश ठेकेदारों को दिया जाए, ताकि प्राकृतिक जलस्त्रोत सुरक्षित रहे और भविष्य की जल किल्लत को टाला जा सके.

* राज्यव्यापी निर्णय की जरुरत
राज्य में इससे पहले जिस तरह से पालकमंत्री पगडंडी रास्ता योजना को जनसहभागिता के जरिए चलाया गया था, ठीक उसी तरह मलजल का प्रयोग करते हुए रास्तों के निर्माण हेतु जनजागृति करने और जनआंदोलन चलाए जाने की जरुरत भी पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल द्वारा जताई गई है. उनके मुताबिक यह केवल किसी एक शहर अथवा जिले से संबंधित मसला नहीं है, बल्कि इसका पूरे राज्य से वास्ता है. जिसके चलते रास्ते विकास महामंडल तथा सार्वजनिक लोक निर्माण विभाग ने तत्काल इस संदर्भ में कडी नियमावली तैयार कर ठेकेदारों को इस बारे में आवश्यक निर्देश देने चाहिए.

* प्रमुख मुद्दे
– जलस्तर – कुओं एवं बोअरवेल के पानी का सडकों के निर्माण हेतु अति प्रयोग किए जाने के चलते प्राकृतिक जलस्त्रोत खतरे में आ गए है.
– पर्यायी उपाय – साफसुथरे पानी की बर्बादी को टालने हेतु खदानों में जमा रहनेवाले पानी तथा वेस्ट वॉटर के प्रयोग का प्रस्ताव.
– भविष्य में खतरा – पानी के हो रहे अमर्यादित प्रयोग की वजह से भविष्य में जलस्त्रोतों के सूख जाने एवं भीषण जल किल्लत पैदा होने का खतरा बना हुआ है.
– प्रभावी पहल जरुरी – पानी को लेकर भविष्य में पैदा होनेवाले खतरे को टालने हेतु अभी से ही पानी के अमर्यादित प्रयोग को रोकने हेतु प्रभावी कदम उठाए जाने की जरुरत है. जिसके तहत सबसे पहले सडकों के निर्माण में साफसुथरे पानी के प्रयोग को प्रतिबंधित करते हुए इस काम हेतु खदानों एवं नालों के पानी के प्रयोग को अनुमति दी जाए.
* सीमेंट रास्तों के निर्माण अथवा खडीकरण जैसे कामों के लिए प्राकृतिक स्त्रोतों के पानी का प्रयोग किया जाता है. जिसके चलते प्रति वर्ष लाखों-करोड लीटर पानी की बिना वजह बर्बादी होती है. यह बात प्राकृतिक दृष्टि से बेहद घातक कही जा सकती है. ऐसे में सडकों के निर्माण हेतु मलजल सहित खदानों एवं नालों के पानी का प्रयोग करना मौजूदा समय की सबसे बडी जरुरत है.
– प्रवीण पोटे पाटिल
पूर्व लोक निर्माण राज्यमंत्री.

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