लगातार ड्यूटी से बढ़ रहा तनाव, एसटी चालक-वाहक अवसाद के शिकार
जिले के 8 डिपो में 1,422 कर्मचारी कार्यरत

* काउंसलर नियुक्ति के फैसले के बावजूद पद खाली
अमरावती /दि.13 – लगातार लंबी ड्यूटी, यात्रियों का दबाव और निजी परेशानियों के कारण महाराष्ट्र राज्य परिवहन (एसटी) के ड्राइवरों और कंडक्टरों में मानसिक तनाव और अवसाद की समस्या बढ़ती जा रही है. कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विभाग में काउंसलर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अमरावती जिले के कई डिपो में अब तक यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है.
जिले में अमरावती, बडनेरा, परतवाड़ा, दर्यापुर, चांदूर बाजार, मोर्शी, वरुड और चांदूर रेलवे जैसे आठ डिपो हैं. इन डिपो में कुल 1,422 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 751 चालक और 670 कंडक्टर शामिल हैं. कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक लगातार ड्यूटी, यातायात का दबाव, समय की पाबंदी और यात्रियों की नाराजगी का सामना करने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है.
परिवहन विभाग का मानना है कि यदि चालक और कंडक्टर मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे तो यात्रियों की यात्रा भी सुरक्षित रहेगी. कई बार बस दुर्घटनाओं के पीछे स्वास्थ्य या तनाव से जुड़ी समस्याएं भी कारण बनती हैं. इसलिए कर्मचारियों को तनावमुक्त रखने के लिए समुपदेशन व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है. निर्णय के अनुसार काउंसलरों को सप्ताह में कम से कम चार डिपो का दौरा कर कर्मचारियों से संवाद करना था. लेकिन कर्मचारियों की कमी और नियुक्तियों में देरी के कारण यह व्यवस्था कई स्थानों पर लागू ही नहीं हो पाई है. कर्मचारियों का कहना है कि मानसिक दबाव के कारण ड्राइवरों में चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें बढ़ रही हैं. यदि समय रहते काउंसलर नियुक्त नहीं किए गए तो इसका असर कर्मचारियों के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.
* समुपदेशक की भूमिका
– ड्राइवर और कंडक्टर से संवाद कर तनाव कम करना
– व्यक्तिगत व पारिवारिक समस्याओं पर मार्गदर्शन देना
– मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सलाह देना
– जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक से संपर्क कराना
कर्मचारियों ने मांग की है कि एसटी निगम जल्द से जल्द सभी डिवीजनों और डिपो में काउंसलरों की नियुक्ति करे, ताकि ड्राइवर और कंडक्टरों को मानसिक सहायता मिल सके और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके.





