शराबी वाहन चालकों की वजह से अमरावती में सडके बनी ‘डेथ जोन’

पौने दो वर्षों में ‘हिट एंड रन’ की हुई ‘हैट्रीक’

* आरोपी वाहन चालक अब भी घूम रहे खुलेआम
* पुलिस की लापरवाही लोगों की जान पर पड रही भारी
अमरावती /दि.17 – अमरावती शहर में अब रात के साथ-साथ दिन के समय भी सडके बिल्कुल सुरक्षित नहीं बची है. बल्कि सडकों पर जगह-जगह मौत अपना जाल बिछाए बैठी है. क्योंकि शराब के नशे में धूत होकर वाहन चलाने की प्रवृत्ति तथा लापरवाही के साथ वाहन चलाने की आदत अब लोगों की जान पर भारी पडने लगी है. विगत पौने दो वर्षों के दौरान अमरावती शहर में एक के बाद एक घटित तीन घटनाओं ने इस बात को काफी मजबूती के साथ रेखांकित किया है. विगत रविवार की आधी रात न्यू एक्सप्रेस हाईवे पर घटित ‘हिट एंड रन’ की घटना में एक पिता-पुत्री की मौत हो गई. इस हादसे के लिए भी शराब के नशे में धूत वाहन चालक द्वारा लापरवाही के साथ वाहन चलाना सबसे प्रमुख वजह रही. जिससे शहर के आम नागरिकों में सडकों पर अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल है.
बता दें कि, रविवार की रात पुराना बाईपास रोड पर एमआईडीसी चौक परिसर में शराब पीकर कार चला रहे कार चालक ने सामने से जा रहे दुपहिया वाहन को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी. इस हादसे में दुपहिया पर सवार पिता-पुत्री की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं दूसरी बेटी गंभीर रुप से घायल हो गई. राजापेठ पुलिस के मुताबिक हादसे के लिए जिम्मेदार कार चालक बुरी तरह से नशे में धूत था और 130 से 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बडनेरा की ओर जा रहा था. जिसने अपने सामने चल रहे दुपहिया वाहन को इतनी जबरदस्त टक्कर मारी की दुपहिया पर सवार तीन में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. साथ ही दुपहिया वाहन चकनाचूर होने के साथ-साथ कार का अगला हिस्सा भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुआ.

* ‘वे’ आरोपी अब तक खुले क्यों?
आए दिन घटित होनेवाली इस तरह की घटनाएं केवल योगायोग नहीं है, बल्कि ‘हमें कौन पकड सकता है’ वाली मानसिकता एवं अपराधिक प्रवृत्ति का संकेत है. शराब पीकर स्टेअरिंग हाथ में लेनेवाले ऐसे वाहन चालक चलते-फिरते ‘सीरियल किलर’ बन चुके है. लेकिन इसके बावजूद प्राणांतिक हादसों के लिए जिम्मेदार रहनेवाले ऐसे कार चालकों के खिलाफ अमुमन कोई बडी कार्रवाई नहीं की जाती. साथ ही ऐसे कार चालक आगे चलकर सबूतो के अभाव में अदालत से छूट भी जाते है. जिसके चलते शराब के नशे में धूत होकर और लापरवाही के साथ वाहन चलाने की प्रवृत्ति में दिनोंदिन इजाफा ही होता जा रहा है.

इन पर्यायो पर अमल जरुरी
– सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार
प्रत्येक चौक-चौराहे तथा राज्य मार्ग व महामार्ग पर हाईडेफिनेशन सीसीटीवी कैमरे लगाना बेहद जरुरी हो गया है. जिससे आरोपियों व अपराधियों की पहचान करना काफी हद तक आसान होगा.
– स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल
गति की अधिकतम मर्यादा का उल्लंघन करनेवाले वाहनों के लिए ऑटोमेटीक ई-चलन प्रणाली के जरिए कार्रवाई की जानी चाहिए.
– तत्काल वैद्यकीय सहायता
कोई भी हादसा घटित होने के बाद ‘गोल्डन अवर’ में घायलों को त्वरीत सहायता दिलाने हेतु महामार्गो पर ट्रॉमा केअर सेंटरों की उपलब्धता होनी चाहिए.
– रास्तों का ऑडिट
सडक हादसों के लिहाज से ‘ब्लैक स्पॉट’ की पहचान सुनिश्चित कर वहां पर सडक दुरुस्ती, प्रकाश व्यवस्था व गतिरोधक जैसे इंतजाम किए जाने चाहिए.

* पौने दो वर्षों का ‘रक्तरंजित’ इतिहास
– पहली घटना – 3 मई 2024
कठोरा नाका परिसर की सम्मति कॉलोनी में भीमसेन वाहने को एक तेज रफ्तार कार ने उडा दिया था. इस हादसे में एक शिक्षक का सहभाग रहने की बात सामने आई थी.
– दूसरी घटना – 20 नवंबर 2024
मोतीनगर चौक में कार चालक युवती ने पांच लोगों को टक्कर मारने के साथ ही कुछ हाथगाडियों को भी उडाया था. उक्त युवती के नशे में रहने की बात सामने आई थी.
– तीसरी घटना – 21 अक्तूबर 2025
लक्ष्मीपूजन वाली रात देवी दर्शन करने हेतु जा रही वैष्णवी थोरात नामक युवती को तेज रफ्तार कार ने जबरदस्त टक्कर मारी थी. इस मामले में भी कार चालक शराब पीकर वाहन चला रहा था. जिसे 250 सीसीटीवी कैमरों के फूटेज खंगालने के बाद गिरफ्तार किया गया था.
– चौथी घटना – 15 मार्च 2026
न्यू एक्सप्रेस हाईवे पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से माकोडे पिता-पुत्री की मौत. इस घटना में भी कार चालक के शराब के नशे में धूत रहने की जानकारी सामने आई.

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