अमरावती जिले में भूजलस्तर में आई भारी गिरावट

बारिश समाधानकारक फिर भी चिंता

* मेलघाट समेत चार तहसीलों में औसतन 2 मीटर पानी नीचे गिरा
* गर्मियों में जलसंकट की आशंका
अमरावती/दि.11 – जिले में इस वर्ष मानसून के दौरान 757.1 मिमी संतोषजनक बारिश दर्ज होने के बावजूद भूजल स्तर में गिरावट प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है. ग्राउंड वॉटर सर्वे एंड डेवलपमेंट एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों के औसत की तुलना में जनवरी 2026 में जिले का भूजल स्तर औसतन 0.49 मीटर नीचे चला गया है.
विशेष रूप से मेलघाट के दूरदराज क्षेत्रों और कुछ मैदानी तालुकों में यह गिरावट 1 से 2 मीटर तक दर्ज की गई है. ऐसे में आने वाली गर्मियों में ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पानी की गंभीर कमी की आशंका जताई जा रही है. अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर में बारिश समाप्त होने के बाद मात्र तीन महीनों में भूजल स्तर में आई यह तेज गिरावट चेतावनी मानी जा रही है. यदि अभी से जल उपयोग की योजना और भूजल पुनर्भरण अभियान शुरू नहीं किए गए, तो मई-जून में पानी के टैंकरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो सकती है.
पिछले पांच वर्षों में जिले का औसत भूजल स्तर लगभग 20 मीटर रहा है, लेकिन जनवरी 2026 में यह गिरकर 7.70 मीटर पर पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी, सिंचाई के लिए भूजल पर अत्यधिक निर्भरता और बोरवेल की बढ़ती संख्या इसके प्रमुख कारण हैं. जिले के 14 तहसीलों में से चार तहसीलों में स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है. सबसे अधिक गिरावट नांदगांव खंडेश्वर में 2.21 मीटर दर्ज की गई है. इसके बाद मेलघाट क्षेत्र के चिखलदरा में 1.87 मीटर और धारणी में 1.85 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है. इसके अलावा वरुड में भी 1.12 मीटर तक जलस्तर नीचे गया है. वहीं कुछ तहसीलों में आंशिक सुधार भी देखा गया है. भातकुली में 0.69 मीटर, दर्यापुर में 0.54 मीटर और अचलपुर में 0.41 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जिले के 63 जलग्रहण क्षेत्रों में स्थित लगभग 150 कुओं की वर्ष में चार बार निगरानी की जाती है. भूवैज्ञानिकों का कहना है कि वरुड, अचलपुर और अंजनगांव जैसे क्षेत्रों में भूजल के अत्यधिक दोहन को नियंत्रित करना अब जरूरी हो गया है, अन्यथा भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है.

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