शहर में साफ-सफाई को लेकर ‘दुबले पर दो आषाढ’ वाली स्थिति

ना मनुष्यबल, ना साजो-सामान, कोणार्क ‘फिसड्डी’

* पहले ही लचर था कामकाज, अब सफाई कर्मियों की हडताल
* जोन क्र. 1 व 5 के प्रभागों में कचरा संकलन व कचरा ढुलाई का काम पूरी तरह से ठप
* दोनों जोन के प्रभागों में जगह-जगह लगे कचरे व गंदगी के ढेर
* सफाई ठप रहने के बावजूद ठेकेदार पर मनपा प्रशासन मेहरबान
* पार्षदों पर फूट रहा नागरिकों का गुस्सा, पार्षद भी हैरान-परेशान
अमरावती /दि.1- इस समय अमरावती शहर को भले ही राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ भारत मिशन एवं प्रभावी प्रशासन के लिए समारोहपूर्वक सम्मानित किया जा रहा है. परंतु जमीनी हकीकत काफी अलग है. क्योंकि न तो अमरावती शहर में ढंग से कोई साफ-सफाई हो रही है और न ही साफ-सफाई के मुद्दे पर प्रशासन भी प्रभावी ढंग से कोई काम कर रहा है. जिसके चलते अमरावती शहर में साफ-सफाई से संबंधित कामों का वैसे ही सत्यानाश हुआ पडा है. वहीं अब सफाई ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा अपने भुगतान सहित अन्य आर्थिक सुविधाओं को लेकर आज हडताल पर चले जाने की वजह से ‘दुबले पर दो आषाढ’ वाली स्थिति बन गई है और शहर में जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे दिखाई दे रहे है.
बता दें कि, पूरे शहर में साफ-सफाई करने के साथ ही कचरा संकलित कर उसे कंपोस्ट डिपो पर पहुंचाने के काम का जिम्मा अमरावती मनपा प्रशासन द्वारा विगत दिनों ही मुंबई की कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया गया था. खास बात यह रही कि, कोणार्क कंपनी को आनन-फानन में यह ठेका देने हेतु जहां एक ओर उस समय अस्तित्व में रहनेवाले जोननिहाय ठेका पद्धति को बीच में ही खत्म किया गया था और तत्कालीन ठेकेदारों से उनके ठेके सरेंडर करने हेतु कहा गया था. वहीं दूसरी ओर कोणार्क कंपनी को ठेका देने हेतु मनपा प्रशासन द्वारा मनपा के नवनिर्वाचित सदन की पहली आमसभा होने का भी इंतजार नहीं किया गया था. जिसके चलते यह आरोप लगने लगा था कि, पूरे शहर का एकल व संयुक्त ठेका देने के लिए कोणार्क कंपनी पर मनपा प्रशासन ने कुछ ज्यादा ही मेहरबानी दिखाई है. 1 नवंबर को सफाई ठेका हासिल करने के बाद कोणार्क कंपनी द्वारा 27 जनवरी को वर्क ऑर्डर हासिल करते हुए अपना कामकाज शुरु किया गया. परंतु एक माह के भीतर ही कोणार्क कंपनी के लचर कामकाज को लेकर पूरे शहर से शिकायती स्वर आने शुरु हो गए. क्योंकि, कोणार्क कंपनी द्वारा न तो पर्याप्त मनुष्यबल ही लगाया गया था और न ही कचरा संकलन हेतु आवश्यक ट्रक व टिप्पर की ही व्यवस्था की गई थी. यही वजह रही कि, विगत 28 फरवरी को केवल साफ-सफाई के मुद्दे पर चर्चा करने हेतु मनपा की विशेष सभा तक बुलाई थी.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, शहर की साफ-सफाई को लेकर बुलाई गई विशेष सभा में महापौर श्रीचंद तेजवानी द्वारा स्वच्छता समिति का गठन करने की बात कही गई थी. परंतु यह मामला भी अगले करीब 15 दिनों तक प्रलंबित रहा और 17 मार्च को हुई मनपा की आमसभा में स्वच्छता समिति का गठन किया गया. लेकिन अब इस बात को भी 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है. इस दौरान स्वच्छता समिति की कोई बैठक तक नहीं हुई. वहीं दूसरी ओर शहर में साफ-सफाई को लेकर समस्या व स्थिति जस की तस है. साथ ही अब ‘दुबले पर दो आषाढ’ वाला मामला यह है कि, पहले ही साफ-सफाई को लेकर लचर कामकाज कर रही कोणार्क कंपनी के कर्मचारियों व सफाई कर्मियों द्वारा आज सुबह से हडताल शुरु करते हुए जोन क्रमांक 1 व जोन क्रमांक 5 के करीब 12 प्रभागों में कचरा संकलन व कचरा ढुलाई के काम को बंद कर दिया गया है.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक आज सुबह से प्रभाग क्र. 1 शेगांव-रहाटगांव, प्रभाग क्र. 2 संत गाडगेबाबा-पीडीएमसी, प्रभाग क्र. 3 नवसारी, प्रभाग क्र. 4 जमील कॉलोनी, प्रभाग क्र. 5 पुराना कॉटन मार्केट-महेंद्र कॉलोनी, प्रभाग क्र. विलास नगर-मोरबाग, प्रभाग क्र. 13 अंबापेठ-गौरक्षण, प्रभाग क्र. 14 जवाहर गेट-बुधवार व प्रभाग क्र. 17 गडगडेश्वर आदि प्रभागों में सफाई ठेकेदार का एक भी सफाई कर्मचारी और कचरा संकलन वाहन नहीं पहुंचे. जिसके चलते संबंधित प्रभागों में आज सुबह से ‘गाडी वाला आया, घर से कचरा निकाल’ वाली आवाज नहीं गुंजी और किसी भी घर से कचरा संकलित नहीं हुआ. साथ ही साथ किसी भी कंटेनर में भरे कचरे को उठाकर कंपोस्ट डिपो तक नहीं पहुंचाया गया.
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि, पूरे शहर की साफ-सफाई सहित कचरा संकलन करते हुए कचरा ढुलाई के लिए जिम्मेदार रहनेवाले कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के पास न तो आवश्यक मनुष्यबल है और न ही कचरा संकलन व कचरा ढुलाई के लिए पर्याप्त संख्या में मिनी ट्रक, टिप्पर ट्रक, जेसीबी व कॉम्पैक्टर ही है. जानकारी के मुताबिक स्थानीय प्रशासन की मेहरबानी के चलते शहर का एकल व संयुक्त सफाई ठेका हासिल करनेवाली कोणार्क कंपनी ने कुछ पुराने ठेकेदारों के ही मनुष्यबल एवं वाहनों को अपने अख्तियार में लेते हुए बेहद लचर तरीके से साफ-सफाई का कामकाज करना शुरु किया था. परंतु कोणार्क कंपनी द्वारा समय पर भुगतान नहीं किए जाने के चलते, जहां पुराने ठेकेदारों ने अपने वाहन वापिस ले लिए, वहीं दूसरी ओर खुद को समय पर भुगतान नहीं मिलने और कंपनी द्वारा पीएफ व ईएसआईसी जैसी आर्थिक सुविधाएं नहीं दिए जाने के चलते वाहन चालकों व सफाई कामगारों ने भी कंपनी के खिलाफ अपना रोष प्रकट करते हुए आज सुबह अचानक ही हडताल कर दी. जिसके चलते कोणार्क कंपनी के साफ-सफाई की डगमगाती नैया अब लगभग डूबने की कगार पर पहुंच गई है.
हैरतवाली बात है कि, जहां एक ओर पूरे शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर मनपा के सत्ता पक्ष और मनपा प्रशासन द्वारा इस धीर-गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली गई है. कोणार्क कंपनी के सफाई कर्मियों द्वारा आज सुबह शुरु की गई हडताल के बारे में जानकारी व प्रतिक्रिया हेतु संपर्क करने का कई बार प्रयास करने के बावजूद महापौर श्रीचंद तेजवानी, मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा तथा स्वच्छता अधिकारी डॉ. अजय जाधव की ओर से कोई प्रतिसाद नहीं मिला. जिसके चलते अमरावती शहरवासियों के स्वास्थ्य से जुडे इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अमरावती महानगर पालिका की संवेदनशीलता व गंभीरता को समझा जा सकता है.
Chetan-Gawande-Amravati-Mandal
* बिना नोटिस हडताल के लिए ठेकेदार पर होगी कार्रवाई
कोणार्क कंपनी के सफाई कामगारों द्वारा आज अचानक ही शुरु की गई हडताल को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे ने बताया कि, उन्होंने आज सुबह इस बारे में मनपा आयुक्त व स्वच्छता अधिकारी से बात की है और कोणार्क कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बिना नोटिस शुरु की गई इस हडताल के चलते कोणार्क कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए. साथ ही मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे ने यह भी स्वीकार किया कि, अमरावती शहर में साफ-सफाई को लेकर कोणार्क कंपनी का कामकाज बिल्कुल भी समाधानकारक नहीं है. जिसके चलते कंपनी के अधिकारियों को कामकाज में सुधार करने के निर्देश दिए गए है. साथ ही साथ ठेका करार की शर्तों में संशोधन करने हेतु गठित पार्षदों के समावेश वाली स्वच्छता अध्ययन समिति की भी बहुत जल्द बैठक बुलाई जाएगी.

* एक ही दिन की हडताल है, जल्द होगा समाधान
मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि, कोणार्क कंपनी के कर्मचारियों ने अपने आर्थिक हितों के चलते कंपनी प्रबंधन के खिलाफ आज एक दिन की हडताल की है और कल से साफ-सफाई का काम एक बार फिर पहले की तरह पूर्ववत हो जाएगा. नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने भी यह स्वीकार किया कि, कोणार्क कंपनी का कामकाज बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है. जिसके चलते शहर में कचरे व गंदगी की समस्या व्याप्त है. परंतु इस समस्या का जल्द ही समाधान कर लिया जाएगा.
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* जनभावनाओं की अनदेखी कर रही मनपा
उल्लेखनीय है कि शहर में व्याप्त कचरे व गंदगी की समस्या को लेकर इन दिनों मनपा के लगभग सभी पार्षदों को प्रभागवासियों के रोष व गुस्से का सामना करना पड रहा है. जिसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पार्षद सुरेखा लुंगारे ने कहा कि, इस स्थिति के लिए पूरी तरह से मनपा प्रशासन जिम्मेदार है. इस समय शहर में हर ओर हनुमान जन्मोत्सव की तैयारियां चल रही है और नागरिकों की बेहद छोटी सी अपेक्षा है कि, उनके रिहायशी क्षेत्रों में स्थित हनुमान मंदिरों के आसपास बेहतर तरीके से साफ-सफाई हो, लेकिन सफाई ठेकेदार के लचर कामकाज की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा, यह सीधे-सीधे जनभावनाओं की अनदेखी है.

* केवल नालियों की हो रही सफाई, घरों से निकलने वाले कचरे का संकलन बंद
प्रभाग क्र. 5 पुराना कॉटन मार्केट-महेंद्र कॉलोनी के पार्षद धीरज हिवसे ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि, उनके प्रभाग में केवल नालियों की साफ-सफाई का ही काम चल रहा है और घर-घर जाकर कचरा संकलित करने एवं कंटेनरों में भरे कचरे को कंपोस्ट डिपो पर पहुंचाने का काम बंद है. चूंकि कोणार्क कंपनी ने पुराने ठेकेदार के वाहन लेकर कचरा संकलन का काम शुरु किया था और अब आर्थिक लेन-देन बकाया रहने के चलते पुराने ठेकेदार ने अपने वाहन वापिस ले लिए. जिसके चलते कचरा संकलन व कचरा ढुलाई का काम बंद है. जिसके लिए मनपा प्रशासन ने सफाई ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई करने के साथ ही समस्या के समाधान हेतु कोई आवश्यक कदम भी उठाना चाहिए.

* हडताल की क्या जरुरत है, वैसे भी काम नहीं हो रहा
प्रभाग क्र. 4 जमील कॉलोनी के एमआईएम पार्षद सलाउद्दीन ने इस पूरे मामले पर अपनी व्यंगात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, कोणार्क कंपनी के कर्मचारियों द्वारा वैसे भी शहर में साफ-सफाई को लेकर कोई भी काम नहीं किया जा रहा. ऐसे में हडताल करते हुए काम बंद आंदोलन करने की कोई जरुरत ही नहीं थी. इसके साथ ही पार्षद सलाउद्दीन ने यह भी कहा कि, कोणार्क कंपनी के पास न तो पर्याप्त संख्या में ड्राईवर एवं सफाई कर्मी है और न ही कचरा संकलन व कचरा ढुलाई हेतु पर्याप्त वाहन ही है. लेकिन इसके बावजूद मनपा प्रशासन द्वारा सभी नियमों को ताक पर रखकर कोणार्क कंपनी को पूरे शहर की साफ-सफाई के लिए एकल व संयुक्त ठेका दिया गया. जिसका सीधा मतलब है कि, मनपा प्रशासन कोणार्क कंपनी पर जबरदस्त तरीके से मेहरबान बना हुआ है.

* नागरिकों को हो रही असुविधा पर ध्यान दें मनपा प्रशासन
मनपा में युवा स्वाभिमान पार्टी के स्वीकृत पार्षद संजय हिंगासपुरे ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि, मनपा प्रशासन के मनमाने रवैये व कामकाज की वजह से अमरावती शहरवासियों को नाहक ही असुविधाओं का सामना करना पड रहा है. साथ ही साथ मनपा प्रशासन द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई जानेवाली आवाजों की भी अनदेखी की जा रही है. जो कदापि स्वीकार्य नहीं है. ऐसे में मनपा की अगली आमसभा में इस विषय को बेहद गंभीरता के साथ उठाया जाएगा.
* सफाई ठेकेदार का कामकाज ही समझ से परे
प्रभाग क्र. 13 अंबापेठ-गौरक्षण की भाजपा पार्षद स्वाती कुलकर्णी ने अपने प्रभाग में कोणार्क कंपनी के साफ-सफाई संबंधी कामकाज के तरीके पर हैरत जताते हुए कहा कि, कोणार्क कंपनी और उसके कर्मचारियों का कामकाज ही समझ से परे है. साथ ही हैरत वाली बात यह भी है कि, ऐसी कंपनी को मनपा प्रशासन द्वारा इतनी जल्दबाजी में ठेका क्यों दिया गया. ऐन हनुमान जन्मोत्सव पर्व के मुहाने पर कोणार्क कंपनी के सफाई कामगारों द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के हडताल पर चले जाने को पूरी तरह से गलत बताते हुए पार्षद स्वाती कुलकर्णी ने कहा कि, इसके लिए कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही साथ कोणार्क कंपनी के साथ किए गए ठेका करार पर पुनर्विचार भी किया जाना चाहिए.

* मनपा आयुक्त को करेंगे कचरा भेंट
प्रभाग क्र. 17 गडगडेश्वर की पार्षद प्रियंका पाटणे ने कोणार्क कंपनी के लचर कामकाज पर संताप व्यक्त करते हुए कहा कि, कोणार्क कंपनी द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अपने कामकाज में कोई सुधार नहीं किया जा रहा. उलटे आज अचानक ही कंपनी के कर्मचारियों ने काम बंद आंदोलन कर दिया. जिसके लिए पूरी तरह से कंपनी के साथ-साथ मनपा प्रशासन की मनमर्जी को जिम्मेदार माना जा सकता है. ऐसे में यदि साफ-सफाई को लेकर स्थिति में जल्द से जल्द कोई सुधार नहीं हुआ, तो मनपा प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करते हुए मनपा आयुक्त को कचरा भेंट किया जाएगा.
* हम पगार और किराया बराबर अदा कर रहे
– ‘कोणार्क’ के मालिक नंद सेठ ने किया दावा
– बराबर पहली तारीख पर ही हडताल को लेकर जताई हैरत
– कहीं कोणार्क के खिलाफ कोई ‘खिचडी’ तो नहीं पक रही
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, कल ही मार्च माह की समाप्ति हुई और कोणार्क कंपनी द्वारा कल 31 मार्च को ही अपने सभी कर्मचारियों व कामगारों के बैंक खातों में उनके पीएफ व ईएसआईसी की कटौती करते ेहुए उनका वेतन जमा करा दिया था. लेकिन इसके बावजूद आज अप्रैल माह की पहली तारीख पर ही कोणार्क कंपनी के सफाई कर्मचारियों व कामगारों ने काम बंद आंदोलन करते हुए एक दिन की हडताल घोषित कर डाली. साथ ही साथ दोपहर होते-होते कुछ नगरसेवकों ने मनपा मुख्यालय पहुंचकर ठिया आंदोलन करना भी शुरु कर दिया. यद्यपि यह सही है कि, कोणार्क कंपनी द्वारा सफाई ठेके पर अमल को लेकर कुछ तकनीकी गलतियां हो रही है. परंतु इस बात की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि, कोणार्क कंपनी ने शहर के कई प्रभागों में कचरा संकलन करने हेतु अपने नए वाहनों को सडकों पर उतारा है और मनपा द्वारा जैसे-जैसे चरणबद्ध तरीके से कोणार्क कंपनी को अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई, वैसे-वैसे कोणार्क कंपनी ने अलग-अलग जोन में साफसफाई करने के साथ ही कचरा ढुलाई का काम करना शुरु किया.
इस बारे में जानकारी देते हुए कोणार्क कंपनी के मालिक नंद सेठ ने बताया कि, अमरावती मनपा क्षेत्र में सफाई ठेके का काम शुरु करते समय कोणार्क कंपनी द्वारा पुराने ठेकेदारों के मनुष्यबल सहित कुछ वाहनों को भी अपने काम पर रखा गया था. जिसकी ऐवज में कोणार्क कंपनी द्वारा नियमानुसार वेतन सहित अन्य भुगतान भी किए जा रहे है. ऐसे में मनुष्यबल या वाहन के लिए भुगतान बकाया रहने की बात पूरी तरह से गलत है. जिसके बारे में वे बहुत जल्द अमरावती आकर स्थिति स्पष्ट करेंगे. साथ ही साथ नंद सेठ ने यह भी कहा कि, कोणार्क कंपनी द्वारा काम पर रखे गए सभी कर्मचारियों के पीएफ व ईएसआईसी की कटौती भी नियमित रुप से की जा रही है.
ऐसे में अब यह सवाल उपस्थित हो रहा है कि, यदि कोणार्क कंपनी द्वारा भुगतान बराबर किया जा रहा है, तो फिर कंपनी के खिलाफ हडताल व आंदोलन क्यों हो रहा है और कहीं कोणार्क कंपनी को लेकर स्थानीय स्तर पर कोई अलग तरह की ‘खिचडी’ तो नहीं पक रही.

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