यवतमाल में रिश्वत देने का ऐसा भी दुस्साहस

कनिष्ठ अधिकारी ने सहायक जिलाधिकारी की मेज़ पर रख दिया पैसों का लिफाफा और बोला-‘साहब ने भेजा है!’

यवतमाल/दि.12 – पांढरकवड़ा में कोची-आंबेझरी परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण कार्य को नियमों को ताक पर रखकर आगे बढ़ाने के लिए सीधे सहायक जिलाधिकारी को रिश्वत देने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि रिश्वत देने की यह पूरी कोशिश सहायक जिलाधिकारी अमित रंजन के कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. इस मामले में सहायक जिलाधिकारी अमित रंजन की शिकायत पर जलसंपदा विभाग के उप अभियंता और एक बड़े ठेकेदार के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है.
* क्या है पूरा मामला
गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे, पांढरकवड़ा स्थित परियोजना कार्यालय में सहायक जिलाधिकारी अमित रंजन अपने शासकीय कार्य में व्यस्त थे. इसी दौरान जलसंपदा विभाग के उप अभियंता त्रिलोक जयप्रकाश त्रिपाठी (35, निवासी यवतमाल) उनके कक्ष में पहुंचे. उन्होंने कोची-आंबेझरी परियोजना के भूमि अधिग्रहण और ठेकेदार की रेत से जुड़ी समस्या का मुद्दा उठाया. तो सहायक जिलाधीश अमित रंजन ने स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट की नई गाइडलाइंस और नए अध्यादेश की आवश्यकता के चलते भूमि अधिग्रहण में विलंब होना तय है. लेकिन त्रिपाठी इस बात को मानने को तैयार नहीं थे और ठेकेदार से मुलाकात कराने पर जोर देने लगे. इस पर रंजन ने साफ कहा कि, ठेकेदार नहीं, अपने कार्यकारी अभियंता को भेजिए. कुछ समय बाद, दोपहर करीब 3:15 बजे, त्रिलोक त्रिपाठी ठेकेदार कामेश विराण्णा डुल्ला (40, निवासी नागपुर) को साथ लेकर फिर से रंजन के कक्ष में पहुंचे. बातचीत के दौरान ही दोनों ने टेबल पर पैसों से भरा लिफाफा सरकाने की कोशिश की.
* ‘यह क्या है?’ पूछते ही उड़ गए होश
जब अमित रंजन ने सख्त लहजे में पूछा कि, यह क्या है? तो जवाब मिला कि यह लिफाफा कार्यकारी अभियंता नितिन बनसोड ने भेजा है. इस पर अमित रंजन भड़क उठे. उन्होंने लिफाफा लेने से इनकार किया, तत्काल पुलिस को फोन किया और दोनों आरोपियों को पुलिस के हवाले कर दिया.
* सीसीटीवी ने खोल दी पोल
रिश्वत देने की यह पूरी घटना अमित रंजन के कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. खास बात यह है कि आरोपियों ने पैसे देते समय कार्यकारी अभियंता नितिन बनसोड का नाम लिया, जिससे इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका और गहरा गई है. यह सीसीटीवी फुटेज अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे अहम सबूत माना जा रहा है.
* कड़ी कार्रवाई की मांग
सीधे सहायक जिलाधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश से प्रशासन में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने का संकेत मिल रहा है. आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों की ओर से मांग उठ रही है कि ठेकेदारों से रिश्वत वसूलने और ऊपर तक पहुंचाने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो.

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