बीजेपी ने अब 10 सीटे दी युवा स्वाभिमान को
आज पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले आने के बाद बडी हलचल

* ए-बी फॉर्म दिए गए तीन प्रत्याशियों को लिया पीछे
* युवा स्वाभिमान के सुरज चौधरी, प्रियंका पाटणे और किरण अंबाडकर को भाजपा का समर्थन घोषित
* महापालिका चुनाव में विड्रोल के दिन बडा धमाका
* अमरावती मंडल की न्यूज का असर
* भाजपा को युवा स्वाभिमान के सामने झुकना पडा
* तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार होने के बावजूद युवा स्वाभिमान के उम्मीदवार को भाजपा का खुला और लेखी समर्थन
* अमरावती के भाजपा इतिहास में पहली राजनीतिक घटना
अमरावती/दि.2 – 15 जनवरी को होने जा रहे महापालिका चुनाव में आज विड्रॉल के अंतिम दिन जमकर सियासी खेल चला. भारतीय जनता पार्टी ने अचानक विधायक रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी के वास्ते छोडी गई पांच सिटों को डबल कर दिया. युवा स्वाभिमान के उम्मीदवारों की खातीर बीजेपी ने दो कदम पीछे खिचते हुए अपने एबी फॉर्म दिए गए और नामांकन दाखिल कर मनपा के रण में उतर चुके उम्मीदवारों को बैठा दिया. शहर के राजनीतिक इतिहास में कदाचित पहली बार किसी राष्ट्रीय पार्टी ने क्षेत्रीय दल के लिए इस प्रकार का बडा कदम उठाया है. बता दें कि पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले खास मनपा चुनाव की रणनीति को दुरूस्त करने आज अमरावती आए थे. उनका युवा स्वाभिमान की ओर से विधायक रवि राणा ने जोरदार आदर सत्कार किया और गहन मंत्रणा कर अपने पांच कार्यकर्ताओं के लिए महापालिका चुनाव में समर्थन बटोर लिया. इस हलचल से महापालिका चुनाव के समिकरण बदलने की जोरदार चर्चा हो रही है. अमरावती मंडल ने इस बारे में गुरूवार को ही विस्तृत समाचार प्रकाशित किया था. मंडल की खबर का असर हुआ और युवा स्वाभिमान ने राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी को झुकने पर विवश कर दिया.
पहले दिया बोरेकर, कराले को टिकट
युवा स्वाभिमान के दो नेता नितीन बोरेकर और मधुरा मिलींद कहाले ने भाजपा में प्रवेश किया था. बीजेपी ने दोनों ही नेताओं को महत्वपूर्ण प्रभाग क्रमांक 10 बेनोडा- भिमटेकडी- दस्तुर नगर से उम्मीदवार बनाया है. बता दे कि नितीन बोरेकर और इंजिनीयर मिलींद कहाले वर्षों से विधायक रवि राणा के साथ काम कर रहे हैं.
तीन स्थानों पर उम्मीदवार लिए पीछे
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और विधायक रवि राणा तथा युवा स्वाभिमान के नेताओं के बीच लंबी मंत्रणा होने के पश्चात बीजेपी ने अपने तीन उम्मीदवारों को पीछे लेकर युवा स्वाभिमान के उम्मीदवारों को समर्थन घोषित किया है. उनमें प्रभाग 11 रूक्मिणी नगर- फ्रेजरपुरा में उतारे गए भाजपा उम्मीदवार शैलेश राउत को बैठने कहा गया है. राउत के स्थान पर भाजपा ने इस ब सीट पर युवा स्वाभिमान के सूरज भारत चौधरी को समर्थन घोषित कर दिया है. ऐसे ही प्रभाग 17 गडगडेश्वर में क सीट की भाजपा की महिला प्रत्याशी मृणाल चौधरी के स्थान पर युवा स्वाभिमान की प्रियंका भूषण पाटणे को समर्थन घोषित किया. जुनी बस्ती प्रभाग 21 में बीजेपी ने आगे बढाए गए क सीट के गौरव बांते को पीछे लेकर युवा स्वाभिमान के किरण वसंतराव अंबाडकर को समर्थन घोषित किया है. भाजपा ने बाकायदा पत्र देकर उक्त बदलाव मंजूर किए है.
पहले छोडे थे पांच स्थान
बीजेपी ने युवा स्वाभिमान के लिए पहले ही पांच सीटेे छोड रखी थी. जिसमे सुतगिरणी प्रभाग 20, जुनी बस्ती प्रभाग 21, राजापेठ प्रभाग 18 की एक-एक सीट के अलावा प्रभाग 9 वडाली एसआरपीएफ की दो सीटों का समावेश था.
* अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम
अमरावती महानगरपालिका चुनाव में एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. अमरावती मंडल में प्रकाशित खबरों के असर के चलते भारतीय जनता पार्टी को युवा स्वाभिमान पार्टी के सामने झुकना पड़ा, जिसके चलते भाजपा ने तीन सीटों पर अपने अधिकृत उम्मीदवार होने के बावजूद युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशी को खुला और लिखित समर्थन देने का फैसला किया है. यह निर्णय न केवल चुनावी रणनीति के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे अमरावती के भाजपा राजनीतिक इतिहास की पहली और अनोखी घटना के रूप में देखा जा रहा है. अब तक भाजपा ने कभी भी अपने प्रत्याशी होने के बावजूद किसी स्थानीय या क्षेत्रीय दल को इस तरह सार्वजनिक समर्थन नहीं दिया था. सूत्रों के अनुसार, अमरावती मंडल में सामने आए जनमत, संगठनात्मक दबाव और ज़मीनी समीकरणों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व को यह फैसला लेना पड़ा. युवा स्वाभिमान पार्टी की मजबूत पकड़ और स्थानीय प्रभाव को नज़रअंदाज़ करना भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता था. भाजपा द्वारा दिया गया लिखित समर्थन पत्र इस निर्णय को और अधिक औपचारिक व स्पष्ट बनाता है. इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अब केवल मौखिक समर्थन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि खुले तौर पर युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ खड़ी है. इस घटनाक्रम के बाद अमरावती की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों के साथ-साथ भाजपा के भीतर भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं. आने वाले दिनों में इस समर्थन का चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.





