मरीयमपुर की आदिवासी बेटियां समाजसेवा की मिसाल बनकर उभरी

आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इनकी सेवाभावना बन रही प्रेरणा

चिखलदरा /दि.27– तहसील के मरीयमपुर गांव की आदिवासी बेटियां आज समाजसेवा की मिसाल बनकर उभरी है. ‘मेलघाट योद्धा बहुउद्देशीय संस्था’ से जुडी महिलाएं व युवतियां बिना किसी मानदेय के वर्षों से आदिवासी समाज की सेवा में जुटी हुई है. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इनकी सेवाभावना लगातार लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है. करीब 500 आदिवासिर्योें की आबादी वाले इस क्षेत्र में रोजगार के सीमित साधन है. इसके बावजूद संस्था की सदस्या ग्रामीण समस्याओं के समाधान, सामाजिक जागरुकता और प्रशासनिक कार्यो में सक्रिय भागीदारी निभा रही है.
पिछले जुलाई माह में चिखलदरा में करीब 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लगने पर संस्था की महिलाओं ने प्रशासन के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था सुचारु करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसके अलावा उन्होंने चार माह तक पुलिस प्रशासन को भी निशुल्क सेवाएं प्रदान की.
संस्थाध्यक्ष प्रवीण धुर्वे के अनुसार संस्था से जुडी 27 से 30 युवतियां पूरी निष्ठा के साथ समाजसेवा कर रही है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें मजदूरी कर अपने परिवार का पालण-पोषण करना पडता है. स्थानीय स्तर पर इन युवतियों के कार्यो की सराहना हो रही है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया प्रतिनिधियों ने शासन व जिला प्रशासन से मांग की है कि, संस्था की इन कर्मठ बेटियों के कार्यो को संज्ञान में लेकर उन्हें उचित मानदेय अथवा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाए, ताकि वे और अधिक उत्साह के साथ समाजसेवा का कार्य जारी रख सके.

 

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