विदर्भ के जंगलों में वाघ संकट गहराया, पांच वर्ष दौरान 38 बाघों की शिकार
हाईवोल्टेज शॉक के जरिए की गई 21 बाघों की हत्या

* अधिकांश बाघों की मौतें हुई संरक्षित क्षेत्र के बाहर
नागपुर /दि.13 – विदर्भ के जंगलों में बाघों का बडे पैमाने पर अधिवास है. जंगलों एवं प्रकृति से बाघ लुप्त न हो और उनका संरक्षण व संवर्धन हो सके, इस हेतु वन विभाग द्वारा सभी स्तरों पर जबरदस्त प्रयास किए जा रहे है. परंतु बाघों के शिकार पर अब भी पूर्णविराम नहीं लगा है. अकेले विदर्भ क्षेत्र में सन 2021 से 2025 तक पांच वर्षों के दौरान कुल 38 बाघों का शिकार किया गया. इसमें भी हाईवोल्टेज विद्युत तारों के जरिए 21 बाघों की हत्या की गई, ऐसी जानकारी खुद वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकडों के जरिए स्पष्ट हुई है.
बता दें कि, नागपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने इस संदर्भ में वन विभाग से जानकारी मांगी थी. जिसके उपरांत वन विभाग द्वारा दी गई जानकारी व उपलब्ध कराए गए आंकडों को देखते हुए विदर्भ क्षेत्र के जंगलों में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है. क्योंकि पिछले पांच वर्षों (2021 से 2026) के दौरान यहां कम से कम 38 बाघों की शिकार होने की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में बाघों की मौत प्राकृतिक कारणों, आपसी संघर्ष और अन्य घटनाओं में हुई है. चौंकाने वाली बात यह है कि विदर्भ में बाघों की कुल 180 मौतों में से 101 मौतें संरक्षित टाइगर रिजर्व के बाहर दर्ज की गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जंगलों के बाहर भी बाघों की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है और वहीं उनके लिए खतरे भी ज्यादा हैं.
वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, चंद्रपुर और उसके आसपास के वनक्षेत्र बाघों की मौत और शिकार की घटनाओं के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील बने हुए हैं. यहां कई मामलों में बाघों को बिजली के अवैध करंट वाले सुरक्षा तार (इलेक्ट्रोक्यूशन) और विषप्रयोग के जरिए मारने की घटनाएं सामने आई हैं. इसके अलावा बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर होने वाले संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) में भी कई बाघों की जान गई है.
* चंद्रपुर क्षेत्र में सर्वाधिक मौतें
विदर्भ के अलग-अलग वन विभागों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बाघों की मौतों का सबसे अधिक आंकड़ा चंद्रपुर वन विभाग में दर्ज हुआ है. जिसके तहत चंद्रपुर में 22 बाघों की मौत होने के साथ ही मध्य चांदा में 17, ब्रह्मपुरी में 13, गड़चिरोली में 13 व नागपुर में 10 बाघों की मौत दर्ज हुई. विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसके कारण उनका आवागमन संरक्षित जंगलों से बाहर ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों तक बढ़ गया है. इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और शिकार की घटनाओं का जोखिम भी बढ़ गया है.
* शिकार के तरीके भी चिंताजनक
बाघों की शिकार के मामलों की जांच में कई बार यह सामने आया है कि शिकारियों द्वारा बिजली के करंट वाले तारों का जाल बिछाया जाता है, जिससे जंगली जानवरों के साथ-साथ बाघ भी करंट की चपेट में आ जाते हैं. इसके अलावा कुछ मामलों में जहरीला मांस डालकर बाघों को मारने की घटनाएं भी सामने आई हैं. वन्यजीव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका भी कई मामलों में जताई गई है.
* संरक्षित क्षेत्रों के बाहर बढ़ रहा खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, विदर्भ के कई टाइगर रिजर्व-जैसे ताडोबा-अंधारी, पेंच और मेलघाट-में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण उनका क्षेत्र विस्तार हुआ है. इसके चलते बड़ी संख्या में बाघ कॉरिडोर और जंगल से लगे ग्रामीण इलाकों में रहने लगे हैं. यही कारण है कि रिजर्व क्षेत्र के बाहर 101 बाघों की मौत दर्ज होना एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है.
* देशभर में भी बढ़ा बाघों का मृत्यु आंकड़ा
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. वर्ष 2025 में देशभर में 166 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिसमें महाराष्ट्र दूसरा सबसे प्रभावित राज्य रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संरक्षण उपायों को और मजबूत नहीं किया गया तो भविष्य में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.
* वन विभाग के प्रयास
वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, कैमरा ट्रैप लगाने, ड्रोन निगरानी और शिकारी गिरोहों पर सख्त कार्रवाई जैसे कदम उठाने शुरू किए हैं. साथ ही ग्रामीणों को अवैध विद्युत कुंपण न लगाने और वन्यजीवों की सूचना तुरंत देने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है.
* दीर्घकालीन रणनीति की जरूरत
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ संरक्षण के लिए केवल रिजर्व क्षेत्र पर्याप्त नहीं हैं. वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के ठोस उपाय आवश्यक हैं. तभी विदर्भ जैसे क्षेत्रों में बाघों की बढ़ती संख्या को सुरक्षित रखा जा सकेगा. ध्यान देनेवाली बात है कि, विदर्भ आज देश के प्रमुख बाघ आवास क्षेत्रों में से एक बन चुका है. यहां बाघों की संख्या बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन उनके लिए सुरक्षित आवास और कॉरिडोर का अभाव नई चुनौतियां भी पैदा कर रहा है. यदि संरक्षण नीति को जंगलों के साथ-साथ जंगल से बाहर के क्षेत्रों तक नहीं फैलाया गया, तो बाघों की बढ़ती संख्या के बावजूद उनकी सुरक्षा पर संकट बना रह सकता है.
* किस वर्ष में कितने बाघों की मौते व शिकार
वर्ष मौते शिकार
2021 32 09
2022 29 07
2023 52 15
2024 26 02
2025 41 05





