पट्टेदार बाघ की प्यास बुझाने जंगल में की जा रही जलापूर्ति

अमरावती /दि.31- इस समय चहुंओर तेज धूप और भीषण गर्मी पड रही है तथा जंगल क्षेत्रों में पानी के स्त्रोत सूखने लगे है. जिसके चलते जंगल में रहनेवाले बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलने की पूरी संभावना बनी हुई है. जिसे ध्यान में रखते हुए चिरोडी वन विभाग ने पोहरा बंदी व चिरोडी परिसर के जंगल में जगह-जगह पर कृत्रिम जलस्त्रोत बनाने के साथ ही वहां पर पानी उपलब्ध कराना शुरु कर दिया है, ताकि इस जंगल परिसर में रहनेवाले बाघ अथवा किसी भी वन्य प्राणी को पानी की तलाश करते हुए जंगल से बाहर न जाना पडे.
इस संदर्भ में वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक चांदुर वन परिक्षेत्र के चिरोडी सर्कल अंतर्गत पश्चिम चिरोडी बीट में पट्टेदार बाघ के लिए नियोजनपूर्वक तैयार किए गए कृत्रिम जलस्त्रोत में नियमित रुप से जलापूर्ति की जा रही है. जिसके चलते उस जलस्त्रोत में इस समय अच्छा-खासा जलसंग्रह उपलब्ध है. प्रति वर्ष ही गर्मी का मौसम शुरु होने के बाद जंगल परिसर में वन्य प्राणियों के लिए नए सिरे से कृत्रिम जलस्त्रोतों की निर्मिती की जाती है. जिसके चलते जंगल में ऐसे कृत्रिम जलस्त्रोतों की संख्या अच्छी-खासी हो गई है और यह व्यवस्था वन्य प्राणियों के लिए काफी लाभदायक भी साबित हो रही है. जिसके चलते जंगल में रहनेवाले बाघ व तेंदुए सहित अन्य सभी तरह के वन्य प्राणियों को पीने के पानी हेतु जंगल में दर-दर नहीं भटकना पडता और पानी की तलाश के चलते जंगल से बाहर आने के लिए मजबूर भी नहीं होना पडता.
बता दें कि, विगत एक सप्ताह से तापमान में जबरदस्त वृद्धि हुई है और लगातार बढती गर्मी के चलते जंगलों में स्थित पानी के प्राकृतिक स्त्रोत पूरी तरह से सूख गए है. लेकिन पट्टेदार बाघ का आश्रयस्थल रहनेवाले झाडी के बगल में स्थित जलस्त्रोत में पाइप लाइन के जरिए पानी भरने की प्रक्रिया वन विभाग द्वारा शुरु की गई है. जिसके लिए चांदुर रेलवे वनपरिक्षेत्र के अधिकारी शीतल घुटे के मार्गदर्शन में चिरोडी के सर्कल अधिकारी अविनाश वानखडे, बीट वनरक्षक अमित गोफणे एवं वन मजदूर शालिक पवार द्वारा जलस्त्रोत में नियमित रुप से पानी डालने और उसकी साफ-सफाई करने का नियोजन किया जा रहा है. साथ ही साथ जंगल परिसर में पट्टेदार बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने हेतु ट्रैप कैमरे भी लगाए जा रहे है.

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