स्वच्छता समिति में एक भी महिला पार्षद का समावेश क्यों नही?
पार्षद सुरेखा लुंगारे ने उठाया सवाल, महापौर को सौंपा निवेदन

* सभी महिला पार्षदों ने अपनी अनदेखी को लेकर जताई नाराजगी
अमरावती /दि.12- अमरावती महानगरपालिका में स्वच्छता से जुड़े मुद्दों को लेकर गठित की गई अस्वच्छता निर्मूलन निगरानी समिति में शहर की एक भी महिला पार्षद का समावेश नहीं किया गया है. इसे लेकर मनपा की सभी महिला पार्षदों में अपनी अनदेखी किए जाने को लेकर काफी हद तक नाराजगी व्याप्त है. ऐसे में सभी महिला पार्षदों की ओर से आवाज उठाते हुए प्रभाग क्रमांक 2 पीडीएमसी-संत गाडगेबाबा की नगरसेविका सुरेखा लंगारे ने महापौर श्रीचंद तेजवानी को दिए गए निवेदन में समिति की व्याप्ति बढ़ाकर उसमें महिला सदस्यों को शामिल करने की मांग की है.
बता दें कि 28 फरवरी को महानगरपालिका के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागृह में स्वच्छता के मुद्दे पर एक विशेष बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में सभी दलों के पुरुष पार्षदों के साथ-साथ महिला पार्षदों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर अपने-अपने प्रभागों में फैली अस्वच्छता की समस्याओं को गंभीरता से उठाया था. बैठक में शहर में बढ़ती गंदगी को देखते हुए एक विशेष निगरानी समिति गठित करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था. हालांकि हाल ही में गठित की गई इस समिति में एक भी महिला पार्षद को शामिल नहीं किया गया, जिसे लेकर असंतोष व्यक्त किया गया है.
इस बात के मद्देनजर पार्षद सुरेखा लंगारे का कहना है कि स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर सबसे अधिक शिकायतें महिलाओं की ओर से ही आती हैं और वे सीधे महिला पार्षदों से संपर्क करती हैं. ऐसे में समिति में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है. उन्होंने मनपा प्रशासन से मांग की है कि अस्वच्छता निर्मूलन निगरानी समिति की संरचना में संशोधन कर प्रत्येक राजनीतिक दल से कम से कम एक महिला पार्षद को सदस्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर महिलाओं के अनुभव और सुझावों का भी लाभ मिल सके.

* महिला पार्षदों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं
इस संबंध में नगरसेविका डॉ. अर्चना अत्राम ने भी कहा कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है और अमरावती महानगरपालिका में भी बड़ी संख्या में महिलाएं निर्वाचित होकर आई हैं. इसके बावजूद स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गठित समिति में महिलाओं को स्थान नहीं देना स्त्री-पुरुष समानता के सिद्धांत के विपरीत है. उन्होंने कहा कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों को लेकर बड़े-बड़े भाषण दिए गए, लेकिन यदि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं को स्थान नहीं दिया जाएगा तो यह समानता केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी. ऐसे में इसे कदापी स्वीकार नहीं किया जा सकता. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, सभी महिलाएं अपने घर एवं आसपास के परिसर की साफ-सफाई को लेकर बेहद जागरुक रहती है. ऐसे में विभिन्न प्रभागों से वास्ता रखनेवाली महिला पार्षदों की साफ-सफाई जैसे मुद्दे पर अनदेखी करना पूरी तरह समझ से परे है.





