पारिवारिक विवाद में पति की आत्महत्या के लिए पत्नी जिम्मेदार नहीं
मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ का फैसला

नागपुर/दि.4– शादीशुदा जिंदगी में पति-पत्नी के बीच झगड़े आम बात हैं इसलिए अगर कोई पति सिर्फ ऐसे झगड़े की वजह से आत्महत्या करता है, तो इसके लिए पत्नी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. बंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके ने एक प्रकरण में फैसला देते हुए यह कहा. यह प्रकरण अमरावती शहर का है.
26 नवंबर 2019 को पति के आत्महत्या करने के बाद राजापेठ पुलिस ने ससुर की शिकायत पर पत्नी के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रवृत्त करने का मामला दर्ज किया था. आरोप के मुताबिक पत्नी अपने पति से गाली-गलौज और मारपीट करती थी और छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा कर वह अपने मायके चली जाती थी. वह अपने पति को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देती थी, वह पैसे भी मांगती थी. उसका किसी दूसरे से प्रेम संबंध था. कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ इन आरोपों के आधार पर पत्नी की अपने पति की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा एकता. दम्पति के बीच गहरे मतभेद थे. सुसाइड की घटना से पहले दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. पत्नी ने कहा कि उसका पति उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी करता था और उसके विवाहेत्तर संबंध भी हैं. हालांकि, पुलिस जांच में वह नहीं पाया गया कि उसका इरादा अपने पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करना था या उसने अपने पति के पास आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं छोड़ा था. कोर्ट ने कहा कि अगर ससुर की शिकायत मान भी ली जाए, तो भी ऐसा नहीं लगता कि पत्नी ने अपने पति को आत्महत्या के लिए प्रवृत्त करने के लिए कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष काम किया.
* विवादित एफआईआर रद्द
पुलिस द्वारा दायर की गई एफआईआर व प्रकरण रद्द करने के लिए पत्नी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. पत्नी द्वारा कोई अपराध नहीं किया गया, यह साबित होने पर न्यायालय ने इस याचिका को मंजूर कर लिया.





