राजकमल चौक का रेलवे ब्रिज बंद रहने से अमरावती की धडकन थमी

नागरिकों समेत शालेय विद्यार्थी व आम नागरिकों को हो रही परेशानी

* एड. श्रीकांत खोरगडे ने राजनीतिक दलों के नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल
अमरावती/दि.13- शहर के सबसे व्यस्त व महत्वपूर्ण समझे जानेवाले राजकमल चौक स्थित रेलवे ब्रिज के कई महिनों से बंद रहने से अमरावती की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. यह फ्लाईओवर शहर के एक छोर को दूसरे छोर से जोडनेवाला प्रमुख मार्ग है. लेकिन इसके बंद होने से बस डिपो, इर्विन चौक और जयस्तंभ चौक क्षेत्रों में पूरा दिन भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है. सुबह-शाम के समय वाहनों की लंबी कतारे लग रही हैं. एंबुलेंस और दमकल वाहनों को रास्ता नहीं मिल पा रहा हैं, जिससे मरीजों और आपातकालीन सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड रहा हैं. स्कूल जानेवाले बच्चों, नौकरीपेशा नागरिकों और व्यापारियों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है. इसके बावजूद राजनीतिक दल के नेताओं द्बारा साधी गई चुप्पी अनेक सवाल खडे कर रही हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता एड. श्रीकांत खोरगडे ने संबंधितों से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की हैं.
एड. श्रीकांत खोरगडे ने अमरावती मंडल को बताया कि, व्यापारियों का कहना है कि राजकमल का रेलवे ब्रिज बंद होने के बाद से ग्राहक संख्या में भारी गिरावट आई है और कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. इसी बीच अमरावती रेलवे स्टेशन को शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. यदि यह योजना अमल में लायी गई तो हजारों यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पडेगा, वहीं ऑटो रिक्शा व टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी पर भी संकट मंडराने की आशंका है. शहर के बीच स्थित किमती रेलवे जमीन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. एड. खोरगडे ने यह भी कहा कि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मनपा चुनाव दो दिन बाद होनेवाले है. इसके बावजूद इस गंभीर विषयों पर सभी राजनीतिक दलों ने चुप्पी साध रखी हैं. सत्ताधारी दल तकनीकी कारणों का हवाला देकर समय टाल रहे हैं, जबकि विपक्ष केवल औपचारिक आंदोलन तक सिमित नजर आ रहा हैं. शहर के जागरिक नागरिकों ने मांग की है कि राजकमल रेलवे ब्रिज की मरम्मत का कार्य युध्दस्तर पर तत्काल पूर्ण किया जाए और रेलवे स्टेशन स्थानांतरण को लेकर प्रशासन स्पष्ट रूप से स्थिति साफ करें. अमरावती की जनता केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही हैं, ऐसा भी एड. खोरगडे का कहना हैं.

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