संघ की पृष्ठभूमि से राज्यसभा तक विनोद तावड़े का रोलरकोस्टर सफर

मुंबई/दि.4 – भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. राज्यसभा चुनाव के जरिए उनका संसदीय राजनीति में पुनरागमन तय माना जा रहा है. 2014 में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहने के बाद 2019 में उन्हें विधानसभा टिकट नहीं मिला था, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर बड़ा दांव चला है.
* अभाविप से राजनीतिक शुरुआत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले तावड़े ने छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के माध्यम से राजनीति में कदम रखा. 1995 में वे पहली बार महाराष्ट्र भाजपा के महासचिव बनाए गए. 2002 से 2011 तक उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली.
* सबसे युवा मुंबई भाजपा अध्यक्ष, 2014 में मंत्री पद
1999 में तावड़े मुंबई भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने और 36 वर्ष की आयु में यह पद संभालने वाले सबसे युवा नेता बने. 2014 के विधानसभा चुनाव में वे मुंबई के बोरिवली सीट से विधायक चुने गए. भाजपा-शिवसेना सरकार बनने पर उन्हें स्कूली शिक्षा, उच्च व तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, मराठी भाषा और सांस्कृतिक कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई.
* डिग्री विवाद और इस्तीफा, टिकट कटा, फिर राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री
2019 में उनकी शैक्षणिक डिग्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ. उस समय विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने उन पर आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की. जून 2019 में तावड़े ने स्कूल शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. 2019 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. हालांकि, कोरोना काल के दौरान सितंबर 2020 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया. इसके एक वर्ष के भीतर ही वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद तक पहुंच गए. अब राज्यसभा के माध्यम से उनकी संसदीय राजनीति में वापसी को भाजपा की रणनीतिक चाल माना जा रहा है.

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