अलविदा जुमा मुबारक: 26 साल बाद बना खास इत्तफाक

पवित्र रमज़ान का आख़िरी जुमा बनेगा यादगार

अमरावती/दि.12 – पवित्र रमज़ान महीने के आख़िरी शुक्रवार यानी अलविदा जुमा को इस साल एक खास संयोग के साथ मनाया जा रहा है. जानकारी के अनुसार ऐसा संयोग करीब 26 साल बाद देखने को मिल रहा है, जिससे रमज़ान का यह आख़िरी जुमा और भी ज्यादा खास बन गया है.
अलविदा जुमा इस्लाम धर्म में बेहद अहम माना जाता है. इस दिन बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों में नमाज़ अदा कर मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ करते हैं. रमज़ान के इस पाक महीने में रोज़ा, इबादत, ज़कात और जरूरतमंदों की मदद को खास अहमियत दी जाती है. उलेमाओं के मुताबिक, रमज़ान का आख़िरी जुमा मुसलमानों के लिए बहुत बरकत और रहमत वाला दिन होता है. इस दिन मस्जिदों में खास नमाज़ और दुआओं का आयोजन किया जाता है, वहीं लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए अल्लाह से रहमत की दुआ करते हैं. मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि 26 साल बाद बने इस खास संयोग ने अलविदा जुमा की अहमियत को और बढ़ा दिया है.
शहर की मस्जिदों में नमाज़ और इबादत के लिए खास इंतज़ाम किए जा रहे हैं, ताकि रोज़ेदार आराम से अपनी इबादत कर सकें. रमज़ान के इस मुबारक मौके पर लोगों ने एक-दूसरे को अलविदा जुमा मुबारक कहकर शुभकामनाएं दीं जाएगी और देश में अमन-शांति की दुआ मांगी जाएगी.
* रमज़ान में 5 जुम्मे का खास संयोग
इस साल रमज़ान के महीने में 5 जुम्मे (शुक्रवार) आये हैं, जिस कारण मुस्लिम समाज में अलविदा जुम्मा को लेकर खास चर्चा देखने को मिल रही है. आमतौर पर रमज़ान में 4 जुम्मे होते हैं, लेकिन इस बार 5 जुम्मे होने से यह रमज़ान खास बन गया. इस्लामी जानकारों के मुताबिक अलविदा जुम्मा रमज़ान के आखिरी शुक्रवार को कहा जाता है. इसलिए चौथा जुम्मा हमेशा अलविदा जुम्मा हो यह जरूरी नहीं है. कई बार ऐसा भी होता है कि चौथे जुम्मे के बाद चांद दिखाई दे जाता है और ईद का ऐलान हो जाता है. ऐसी स्थिति में चौथा जुम्मा ही अलविदा जुम्मा बन जाता है. लेकिन अगर रमज़ान पूरे 30 दिन का होता है और पांचवां जुम्मा आता है, तो फिर पांचवां जुम्मा ही अलविदा जुम्मा कहलाता है. यही वजह है कि इस साल रमज़ान में 5 जुम्मे होने से लोगों में खास उत्साह देखा जा रहा है.उलेमाओं का कहना है कि अलविदा जुम्मा रमज़ान के आखिरी शुक्रवार की नमाज़ होती है, जिसमें बड़ी तादाद में रोज़ेदार मस्जिदों में पहुंचकर नमाज़ अदा करते हैं और मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगते हैं.इस खास मौके पर शहर की मस्जिदों में भी नमाज़ के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं और मुस्लिम समाज के लोग रमज़ान के इस मुबारक महीने के आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत में जुटे हुए हैं.

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