विदर्भ की स्कूलें अब 30 जून से ही खुलेंगी

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार के 15 और 22 जून वाले आदेश रद्द

अमरावती/नागपुर/दि.10 – भीषण गर्मी से जूझ रहे विदर्भ क्षेत्र के लाखों विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार के उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत स्कूलों को 15 जून अथवा बाद में 22 जून से शुरू करने का निर्णय लिया गया था. न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अब विदर्भ क्षेत्र की स्कूलें पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार 30 जून से ही खुलेंगी. इस महत्वपूर्ण फैसले को महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है. संगठन ने भीषण गर्मी, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और शिक्षकों की कार्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए सरकार के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी थी.
* गर्मी के कारण उठा था विवाद
विदर्भ क्षेत्र देश के सबसे गर्म इलाकों में गिना जाता है. इस वर्ष भी मई और जून के दौरान कई जिलों में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. अमरावती, अकोला, वर्धा, नागपुर, यवतमाल, चंद्रपुर और भंडारा सहित अनेक जिलों में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण अभिभावकों और शिक्षक संगठनों ने स्कूलें जल्दी शुरू करने के निर्णय का विरोध किया था. शिक्षकों का कहना था कि इतनी अधिक गर्मी में छोटे बच्चों को स्कूल भेजना स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक हो सकता है. लू, निर्जलीकरण और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. दूसरी ओर अनेक स्कूलों में पर्याप्त शीतल पेयजल, पंखे और अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बताई गई थी.
* सरकार ने पहले 15 जून, फिर 22 जून की तारीख तय की
राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रारंभिक रूप से स्कूलें 15 जून से शुरू करने का निर्णय लिया था. इस निर्णय का व्यापक विरोध होने के बाद सरकार ने 9 जून को एक नया परिपत्र जारी कर स्कूलों के खुलने की तिथि 22 जून करने का प्रस्ताव रखा. सुनवाई के दौरान सरकार ने यही परिपत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अनुरोध किया कि स्कूलों को 22 जून से शुरू करने की अनुमति दी जाए. हालांकि याचिकाकर्ता शिक्षक समिति ने कहा कि यह बदलाव भी पर्याप्त नहीं है और विदर्भ की भौगोलिक तथा जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व की व्यवस्था ही कायम रखी जानी चाहिए.
* हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश किए निरस्त
मामले की सुनवाई 10 जून को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में हुई. न्यायमूर्ति अनिल किल्लोर और न्यायमूर्ति राजेश वाकोड़े की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार के 15 जून तथा 22 जून से स्कूलें शुरू करने संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया. न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में विदर्भ क्षेत्र की स्कूलों के संबंध में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व से लागू शासन व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए. इस टिप्पणी को शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
* लाखों विद्यार्थियों और शिक्षकों को राहत
फैसले के बाद विदर्भ के लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है. शिक्षक संगठनों का कहना है कि न्यायालय ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और हितों को प्राथमिकता दी है. महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति के पदाधिकारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल शिक्षकों की नहीं, बल्कि पूरे विद्यार्थी समुदाय की जीत है. उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच स्कूल शुरू करने का निर्णय व्यावहारिक नहीं था और न्यायालय ने वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए उचित फैसला दिया है.
* शिक्षा विभाग जारी करेगा संशोधित निर्देश
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब शिक्षा विभाग को नई अधिसूचना जारी करनी होगी. विभागीय सूत्रों के अनुसार न्यायालय के निर्देशों का अध्ययन करने के बाद जल्द ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूलों को संशोधित आदेश भेजे जाएंगे.
फिलहाल स्पष्ट हो गया है कि विदर्भ क्षेत्र में नया शैक्षणिक सत्र 30 जून 2026 से ही प्रारंभ होगा. इससे विद्यार्थियों को अतिरिक्त तैयारी का समय मिलेगा, वहीं अभिभावकों और शिक्षकों को भी भीषण गर्मी के दौर में राहत मिलेगी.

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