सरकारी नौकरी : ट्रांसफर के नियम ही बदल गए!
कर्मचारियों के लिए शासन आदेश जारी

मुंबई/दि.16 – सरकारी नौकरी में काम करने वाले कई लोगों को देखकर निजी क्षेत्र में काम करने वालों को इन लोगों से ईर्ष्या होती है. इन कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन, लागू होने वाले वेतन आयोग और सबसे महत्वपूर्ण छुट्टियां. साथ ही कई सुविधाएं मिलने के कारण, सरकारी नौकरी के लिए ही प्रयास करें ऐसा सलाह भी कुछ लोग युवाओं को देते हैं. ऐसे में सरकार की सेवा में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए हाल ही में एक महत्वपूर्ण जानकारी शासन द्वारा जारी की गई है. ट्रांसफर के नियमों में हुए बदलाव से जुड़ी यह जानकारी होने के कारण इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
* ट्रांसफर की खबर ने ध्यान खींचा?
महाराष्ट्र राज्य शासन के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 15 अप्रैल को एक शासन आदेश जारी किया. जिसमें इस विभाग के ग्रुप बी, सी और डी के कर्मचारियों के ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुव्यवस्था तथा पदों में संतुलन बनाए रखने के लिए एक व्यापक ट्रांसफर नीति निर्धारित की गई है.
* अब प्रतिशत के अनुसार ट्रांसफर
किसी भी कार्यालय या विभाग में कुल कर्मचारियों के 30 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का एक साथ सालभर में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा. हर कैलेंडर वर्ष में अनुरोध ट्रांसफर के आदेश सितंबर और दिसंबर महीने में जारी किए जाएंगे. वहीं, ट्रांसफर प्रक्रिया के लिए राजनीतिक दबाव का उपयोग करने पर संबंधित कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. यह नीति सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों, कार्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगी. ग्रुप बी के कर्मचारियों के ट्रांसफर का अधिकार सचिव 2 के पास होगा, जिसे स्वास्थ्य मंत्री की मंजूरी होगी. जबकि, ग्रुप डी के कर्मचारियों के ट्रांसफर का अधिकार स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय पुणे के अंतर्गत प्राधिकरण संचालक के पास होगा.
* क्या है ट्रांसफर का प्राथमिकता क्रम?
– लकवा से पीड़ित कर्मचारी / परिवार में आश्रित सदस्य
– दिव्यांग कर्मचारी / विशेष बच्चों के माता-पिता
– हृदय सर्जरी करवा चुके कर्मचारी
– जन्म से एक किडनी वाले / डायलिसिस पर चल रहे कर्मचारी
– कैंसर पीड़ित कर्मचारी या परिवार में आश्रित सदस्य
– पूर्व / वर्तमान सैनिक / अर्धसैनिक बलों के जवानों की पत्नी / विधवा
– विधवा कर्मचारी
– अविवाहित महिला कर्मचारी
– तलाकशुदा महिला कर्मचारी
– अनुरोध होने पर 53 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मचारी
– पति-पत्नी एकत्रीकरण
– 10वीं / 12वीं में पढ़ने वाले बच्चे





