पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अपनी प्रेम कहानी का मजेदार किस्सा सुनाया

दूध बेचा, ऑटो चलाया और घर-गृहस्थी चलाई

* घरवालों के विरोध के बावजूद शादी की
* उनकी लव स्टोरी सुनकर सांगली के सभागृह में जोरदार हंसी गूंजी
नागपुर/दि.18 – सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर द्वारा की जा रही आलोचना पर जवाब देते हुए महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने लड़की भगाने का मजेदार किस्सा सुनाया. सांगली के मीरज में डिजिटल मीडिया के राज्य अधिवेशन में वे बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने अपनी प्रेम कहानी सामने रखी. उन्होंने प्रेम के लिए कुछ भी करने की तैयारी दिखाई. घरवालों के विरोध के बावजूद प्रेम के लिए संघर्ष करने की बात उन्होंने बताई. उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कहा कि प्रेम के लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
* फिल्म देखी और पुलिस ने पकड़ लिया
नागपुर में ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म देखने के लिए होने वाली पत्नी को साथ लेकर गया. उसके बाद नाबालिग होने के कारण पुलिस ने पकड़ लिया. नाबालिग लड़की को भगाने का मामला दर्ज हुआ. इस वजह से 7 दिन जेल में रहना पड़ा, ऐसा किस्सा मंत्री महोदय ने बताया. आगे चलकर शादी हुई, मेरी लड़की भगाने की आलोचना करने वाले उस इन्फ्लुएंसर को यह नहीं पता कि वह मेरी ही पत्नी थी, ऐसा उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा. मंत्री बावनकुले की लव स्टोरी सुनकर सभागृह में जोरदार हंसी छूट गई.
* प्रेम के लिए कुछ भी
घर की स्थिति अच्छी थी. बावनकुले तेली समाज से हैं तो उनकी पत्नी कुणबी समाज से हैं, उनके इस प्रेम विवाह का घरवालों ने विरोध किया. घर में 200 एकड़ जमीन और बड़ा परिवार था. लेकिन घरवालों को यह शादी मंजूर नहीं थी. वे 10 बाय 10 के कमरे में रहे. जरूरत पड़ने पर उन्होंने दूध बेचा. ऑटो चलाया. परिस्थिति ऐसी थी कि घर चलाने के लिए यह काम करना पड़ा, ऐसा बावनकुले ने बताया. वह समय कठिन था. परिस्थितियों के अनुसार काम करना पड़ा. लेकिन आगे चलकर घरवालों का विरोध खत्म हो गया. उन्होंने दोनों को स्वीकार कर लिया. बावनकुले ने यह प्रेम कहानी कार्यक्रम में सुनाई.
* घर से निकाल दिया
ज्योती बावनकुले और चंद्रशेखर बावनकुले ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म देखने गए थे. लेकिन वहां पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया. नाबालिग लड़की को भगाने के मामले में केस दर्ज हुआ और जेल जाना पड़ा. दोनों के घरवाले नाराज थे. बावनकुले के घरवालों ने उन्हें घर से निकाल दिया. उस समय प्रेम और परिवार के लिए जो भी काम करना पड़ा, उसकी याद बावनकुले ने ताजा की.

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