जालना की मोतीराम अग्रवाल बैंक पर पाबंदियां

रिजर्व बैंक द्वारा एक्शन

जालना/दि.18 – जालना की मोतीराम अग्रवाल मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक पर देश की बैंकों की बैंक मानी जाने वाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कड़ी कार्रवाई की है. इस बैंक पर रिजर्व बैंक ने छह महीने के लिए प्रतिबंध लगाए हैं और करोड़ों का घोटाला सामने आया है. जो चीजें अस्तित्व में नहीं हैं उन्हें कागजों पर दिखाकर करोड़ों का गबन किया गया है. यह मामला पुलिस तक पहुंच गया है.
* यह बैंक कौन सी है और आखिर हुआ क्या?
मौजूद न होने वाले कृषि माल को मौजूद दिखाकर 177 लोगों के नाम पर कर्ज उठाने का मामला महाराष्ट्र के जालना में सामने आया है. इस माध्यम से 23 करोड़ 33 लाख का आर्थिक घोटाला किया गया है. जिस बैंक में यह घोटाला हुआ है, उसका नाम मोतीराम अग्रवाल मर्चेंट को-ऑपरेटिव बैंक है. इस घोटाले से जालना जिले के बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को हिरासत में लिया है.
* मुख्य सूत्रधार कौन?
मौजूद न होने वाले कृषि माल को मौजूद दिखाकर 177 लोगों के नाम पर कर्ज उठाया गया. गोदाम में कोई भी कृषि माल नहीं होने के बावजूद उसे दिखाकर 177 लोगों के नाम पर कर्ज उठाया गया. इस मामले में बैंक मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने रायचंद्र पुरंगळ नाम के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी को अदालत में पेश करने पर उसे 8 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है. पुरंगळ पंचमुखी वेयरहाउस का संचालक है. कृषि माल गिरवी रखने के नाम पर उसने फर्जी रसीदें तैयार कीं.
* किन शाखाओं को लगाया गया चूना?
पुरंगल द्वारा तैयार की गई रसीदों के आधार पर बैंक की न्यू मार्केट यार्ड, भोकरदन, अंबड, टेंभुर्णी, गेवराई, मंठा जैसी विभिन्न शाखाओं से कर्ज लिया गया. दूसरे आरोपी का नाम निलेश्वर शेषराव भोसले है, जिसकी उम्र 46 वर्ष है. आर्थिक अपराध शाखा ने भोसले को गिरफ्तार किया है.
* रिजर्व बैंक ने लगाए प्रतिबंध
लगभग 5 साल से यह घोटाला चल रहा था, यह भी सामने आया है. इस घोटाले में बैंक के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल होने की बात सामने आई है. रिजर्व बैंक ने इस घोटाले के चलते 10 अप्रैल से 6 महीने के लिए बैंक पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. इस घोटाले में अब किन-किन के नाम सामने आते हैं, इस पर सबकी नजर है.

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