2.40 करोड के राशन घोटाले में दो ‘आयओ’ नामजद

जिलाधीश ने दोनों को पहले ही किया था निलंबित

* घोटाले में शामिल 6 राशन दुकानों के लाईसेंस भी रद्द
अमरावती/दि.23 – जिला आपूर्ति विभाग के निरीक्षण अधिकारियों एवं राशन दुकानदारों की आपसी मिलिभगत के तहत जिले में करीब 2 करोड 40 लाख 48 हजार 72 रुपए का राशन घोटाला किए जाने का मामला हाल ही में उजागर हुआ था. जिसकी जानकारी मिलते ही जिलाधीश आशीष येरेकर ने 6 राशन दुकानदारों का लाईसेंस रद्द करते हुए दो निरीक्षण अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया था. वहीं अब गत रोज राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला आपूर्ति अधिकारी निनाद लांडे ने उन दोनों निलंबित अधिकारियों के खिलाफ गाडगे नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है.
जिला आपूर्ति अधिकारी निनाद लांडे द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक अमरावती तहसील के आपूर्ति विभाग में निरीक्षण अधिकारी (ग्रामीण) के तौर पर कार्यरत जितेंद्र सुरेश पाटिल (36) ने जनवरी 2023 से अक्तूबर 2024 की कालावधि के दौरान कुछ राशन दुकानदारों से मिलिभगत करते हुए उन्हें 3873.90 क्विंटल अतिरिक्त अनाज दिया. जिसके उपरांत जितेंद्र पाटिल का तबादला होने के चलते उनके स्थान पर चैताली अजय यादव (35) की नियुक्ति की गई थी और चैताली यादव ने भी अक्तूबर 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान 2867.68 क्विंटल सरकारी अनाज का घोटाला किया. इन दोनों अधिकारियों द्वारा किया गया यह घोटाला 27 मार्च 2026 को सामने आई जांच रिपोर्ट के जरिए स्पष्ट हुआ और पता चला कि, इन दोनों अधिकारियों द्वारा करीब 2 करोड 40 लाख 48 हजार 72 रुपयों का राशन घोटाला किया गया है. इसी रिपोर्ट के आधार पर शेवती जहांगीर के भारत राजूरकर, उदखेड के कमल चतुर्भूज लोणदासे, बोडाणा के ए. पी. ठाकरे, शिराला के अनुप हरिनारायण राठी व आशीष राधाकिशन शर्मा तथा देवरी के आर. आर. राऊत ऐसे 6 राशन दुकानदारों के लाईसेंस को रद्द कर दिया गया था. साथ ही दोनों निरीक्षण अधिकारियों पर भी राशन दुकानदारों के साथ मिलिभगत करने का आरोप लगाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था. शिकायत के मुताबिक पाटिल ने 1 करोड 49 लाख 88 हजार 284 रुपए तथा चैताली यादव ने 90 लाख 49 हजार 788 रुपए के सरकारी राशन का अपहार कर सरकार का आर्थिक नुकसान किया.
* अपहार का आंकडा बढने की संभावना
दोनों अधिकारियों को निलंबित करने से पहले उनके द्वारा किए गए घोटाले की जांच की गई. परंतु वर्ष 2019 से 2022 तक ई-पॉस डाटा उपलब्ध नहीं रहने के चलते कितने क्विंटल सरकारी अनाज की अफरातफरी हुई है और इस घोटाले की निश्चित रकम कितनी है, इस पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है. जिसके चलते मार्च 2026 में प्राप्त जांच रिपोर्ट को अंतरिम माना जा रहा है. ऐसे में पुराना डाटा प्राप्त होने के बाद जांच को पूरा किया जा सकेगा. जिसके चलते घोटाले की रकम के बढने की पूरी संभावना है.

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