14 दुकानदारों पर एफईआर की तैयारी

अमरावती में 2 करोड का राशन घोटाला

* वर्ष 2023 से 2025 तक कोटी से ज्यादा राशन वितरित किया
अमरावती/दि.25– सरकारी राशन वितरण प्रणाली में उजागर हुए घोटाले के मामले में निलंबित दो निरीक्षकों पर गाडगे नगर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद अमरावती ग्रामीण क्षेत्र के 14 राशन दुकानदारों पर भी मामला दर्ज करने की तैयारी चल रही हैं. अधिकारियों के अनुसार, जिलाधिकारी की अनुमति के बाद इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी. राज्य सरकार को करीब 2 करोड रुपए की चपत लगाए जाने का खुलासा हुआ हैैं, जिसे जिले के इतिहास में ऐसा पहला बडा राशन घोटाला माना जा रहा हैं. मामले में प्रशासन ने सख्त रूख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी हैं. जिला आपूर्ति अधिकारी नीनाद लांडे द्बारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि अमरावती तहसील तथा चांदूर बाजार तहसील में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. अमरावती तहसील कार्याल में कार्यरत तत्कालीन निरीक्षण अधिकारी चैताली यादव ने अक्तूबर 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान अपने कार्यक्षेत्र के सात राशन दुकानदारों को 2237.68 क्विंटल अतिरिक्त अनाज वितरित किया, जिससे शासन को लगभग 90.54 लाख रुपए निरीक्षण अधिकारी जितेंद्र पाटिल पर जनवरी 2023 से अक्तूबर 2024 के बीच 3873.90 क्विंटल अतिरिक्त अनाज मंजूर करने का आरोप हैं. साथ ही चांदूर बाजार तहसील में 413 क्विंटल अतिरिक्त अनाज वितरण का मामला भी सामने आया हैं, जिससे शासन को करीब 1.49 करोड रुपए का नुकसान हुआ. जांच में स्पष्ट हुआ है कि संबंधित अधिकारियों ने कूछ राशन दुकानदारों के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी आंकडों के आधार पर नियत मात्र से अधिक अनाज मंजूर किया और वितरित किया. यह कृत्य सरकारी नियमों का गंभीर उल्लंघन हैं और इसे सरकारी अनाज के दुरूपयोग के रूप में देखा जा रहा हैं. जिले में 1917 राशन दुकानदार हैं. इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद अब जिले में अन्य राशन दुकानदारों द्बारा किए जा रहे वितरण की भी गहन जांच की मांग जोर पकडने लगी हैं. विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक स्तरों पर यह मांग उठ रही है कि जिले की सभी राशन दुकानों का व्यापक ऑडित कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को उजागर किया जा सके. गौरतलब है कि अमरावती जिले में कुल 1914 राशन दुकानदार कार्यरत हैं. ऐसे में इस घोटाले के बाद पूरे वितरण तंत्र की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ गया हैं.प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अपूर्ति विभाग अब सभी रिकॉर्ड की विस्तृत जांच करने की तैयारी में हैं. अधिकारियों का कहना हैं कि जहां भी अनियमितता सामने आएगी, वहां संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

* आरोपियों के खिलाफ कडी कार्रवाई
इस मामले में महाराष्ट्र फूड ग्रेन रेशनिंग ऑर्डर 1966 लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2015 तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ हैं. आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7 के तहत कार्रवाई की जा रही हैं.
– निनाद लांडे,
जिला आपूर्ति अधिकारी

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