दारापुर के तक्षशिला महाविद्यालय में विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया
बडी संख्या में विद्यार्थी रहे उपस्थित

दर्यापुर /दि.25- वाचाल तर वाचाल इस प्रेरणादायी विचार को केंद्र में रखते हुए, तक्षशिला अभियांत्रिकी व तांत्रिकी महाविद्यालय, दारापुर के ग्रंथालय विभाग ने विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर विभिन्न उपक्रमों का आयोजन किया. वाचन संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाले ये सभी उपक्रम महाविद्यालय के ग्रंथालय में उत्साह और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ संपन्न हुए.
कार्यक्रम की शुरुआत ग्रंथ पूजन तथा भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, सावित्रीबाई फुले और श्री दादासाहेब गवई की प्रतिमाओं के पूजन से हुई. इसके बाद महाविद्यालय के ग्रंथपाल प्रा. वाय. एन. गोंडाने ने विद्यार्थियों से खुलकर संवाद किया. पुस्तक केवल जानकारी का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन को दिशा देने वाला और विचारों को नई ऊंचाई देने वाला एक दीपस्तंभ है, ऐसा बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों के मन में वाचन की भावना को और गहराई से स्थापित किया.
इसके बाद ‘मेरा पसंदीदा पुस्तक’ इस विषय पर विद्यार्थियों ने अनुभव कथन सत्र में भाग लिया. जिसमें साहित्यिक, प्रेरणादायी, आत्मकथा, उपन्यास आदि विभिन्न पुस्तकों का उल्लेख करते हुए वाचन की आदत से उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव विद्यार्थियों ने साझा किए. इसी दिन महाविद्यालय के ग्रंथालय में ‘ग्रंथ प्रदर्शनी’ आयोजित की गई थी. जिसमें शैक्षणिक, प्रेरणादायी, आत्मकथा, साहित्यिक, उपन्यास आदि विभिन्न प्रकार की पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई थीं. ‘वाचन प्रेरणा फलक’ इस विशेष उपक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने स्वयं पढ़ी गई पुस्तकों के प्रभावी वाक्य और उद्धरण लिखकर प्रदर्शनी में सहभाग दर्ज किया. इस सहभाग से विद्यार्थियों की पढ़ने की रुचि और विचारों की परिपक्वता स्पष्ट हुई.
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी. टी. इंगोले ने की. उन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया. इस कार्यक्रम का संयोजन महाविद्यालय के ग्रंथपाल प्रा. वाय. एन. गोंडाने ने किया तथा संचालन देवेंद्र चोरे ने किया. इस कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रवीण बांगरे, एम. पी. गवई, अंकुश बुरघाटे ने परिश्रम किया. कार्यक्रम में डॉ. एन. एस. घोटकर, प्रा. पी. एस. दंडे, प्रा. अतुल कौशल, प्रा. अतुल चिंचमलातपुरे, प्रा. पूजा देशपांडे, प्रा. ए. एस. बोंबटकर, प्रा. डॉ. संतोष यावले, प्रा. डॉ. श्रीकांत दाभने, प्रा. धीरज मनोवार, प्रा. धीरज आष्टोणकर, प्रा. एस. एस. खरचे, प्रा. केवल मोहोड, प्रा. मोहिनी वानखेडे, प्रा. मनीष बिजवे, प्रा. मेघा चिंचमलातपुरे, प्रा. अपेक्षा इंगले, प्रा. गौरी गुल्हाने, प्रा. एस. पी. झाडे, अर्पित कालमेघ, प्रकाश मोहोड, मुकेश बनसोड, प्रवीण ठाकरे, योगेश सवई सहित सभी प्राध्यापकवर्ग, शिक्षकेतर कर्मचारी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे.





