अमरावती-परतवाडा मार्ग की खत्म नहीं हो रही ‘साढेसाती’

अमरावती /दि.28- शनि एक राशि में अमूमन ढाई वर्ष रहता है तथा कुल तीन राशियों में भ्रमण करता है. जिसके चलते इन साढे सात वर्षों के समय को साढेसाती कहा जाता है, जो साढे सात वर्ष बाद खत्म भी हो जाती है. परंतु अमरावती-परतवाडा राज्य मार्ग की साढेसाती खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है, बल्कि यहां पर विगत 23 वर्षों से शनि लगातार अपना ठिया जमाए बैठा है. जिसके चलते इस रास्ते का काम अधर में लटका हुआ है.
बता दें कि, दो राज्यों को जोडनेवाले अमरावती-अचलपुर-बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) अंतरराज्य महामार्ग को विगत 23 वर्षों से दर्जोन्नति के अंतर्गत राष्ट्रीय महामार्ग का दर्जा मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है. सन 2002-03 के दौरान यह मार्ग राष्ट्रीय महामार्ग दर्जोन्नति हेतु सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग द्वारा प्रस्तावित किया गया था. परंतु यह प्रस्ताव अधर में ही लटका रहा. आगे चलकर 2015 में एक बार फिर दर्जोन्नति अंतर्गत राष्ट्रीय महामार्ग का स्वप्न नागरिकों को दिखाया गया तथा राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण द्वारा इस मार्ग का सर्वेक्षण करते हुए डीपीआर भी मंजूर किया गया, परंतु इस बार भी मामला शनि की वक्रदृष्टि में अटका रहा. जिसके चलते यह राज्य मार्ग आखिर राष्ट्रीय महामार्ग कब बनेगा, यह सवाल उपस्थित हो रहा है.
* पेड काट डाले, दर्जा नहीं बढा
महामार्ग बनाने हेतु सडक के दोनों ओर स्थित करीब 2 हजार 500 वृक्षों को काटने की बात तय की गई. साथ ही इन वृक्षों के बदले तीन गुना अधिक यानि साढे 7 हजार रुपए लगाने का नियोजन भी किया गया था. परंतु यहां एक ओर पेडों की कटाई का काम शुरु हो गया है, वहीं दूसरी ओर अब तक एक भी नया वृक्ष नहीं लगाया गया है. जिसके चलते इस मार्ग के जल्द से जल्द दर्जोन्नति की जरुरत बताई जा रही है.
* पीडब्ल्यूडी के पास से निकाला गया काम
हाईब्रीड एन्यूईटी में यह मार्ग प्रस्तावित किया गया था. जिसके चलते नया डीपीआर बनाया गया, जो एक बार फिर शनि की वक्रदृष्टि में अटक गया. 54 किमी की लंबाई वाला यह निर्माण कार्य लोकनिर्माण विभाग के पास से हटा लिया गया तथा महाराष्ट्र राज्य मूलभूत सुविधा विकास महामंडल के पास हस्तांतरित किया गया.
* सन 2018 में ‘एडीवी’ से मान्यता
सन 2018 में इसी मार्ग के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीवी) का एक और सपना दिखाया गया. एडीवी ने इस मार्ग के चौपदरीकरण सहित काम को तत्वत: मान्यता दी तथा भोपाल स्थित आयकॉन इंजीनियरिंग ने वर्ष 2019 में इस सडक के काम का सर्वेक्षण किया. ‘जहां गांव, वहां कांक्रीट सडक’ अभियान के तहत इस महामार्ग के चौपदरीकरण हेतु 600 करोड रुपए के अपेक्षित खर्च का डीपीआर बनाया गया, परंतु यह प्रस्ताव भी अधर में लटक गया.





