आखिर क्या है स्कॉयवाक शुरू न होने का कारण

दै. मंडल लगातार ले रहा है फॉलोअप

चिखलदरा/दि.22- 2019 में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के ड्रिम प्रोेजेक्ट के ेतौर पर प्रस्तावित स्कॉयवाक का काम वाईल्ड लाइन के परमिशन के कारण कई बार बंद चालू हुआ. दिल्ली से आनेवाली वाइल्ड लाईन के परमिशन के लिए काम शुरू होने के पहले ही परमिशन का प्रस्ताव डालना यह जबाबदारी सिडको की थी. मगर 2 साल तक परमिशन ही नहीं मांगी गई. जिस कारण 2 साल तक काम बंद रहा तथा प्रकल्प की इस्टीमेट कॉस्ट भी बढ गई. मगर लापरवाह सिडको विभाग के किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई. उसी तरह 2025 में आयआयटी कानपुर के स्कॉयवाक के 500 मीटर के मध्य में 250 मीटर पर एक स्टे यानी जमीन से एक कॉलम खडा करने का काम सुझाव सुरक्षा की दृष्टि से दिया गया. मगर लापरवाह सिडको विभाग के 15 अप्रैल 2026 को उसकी परमिशन का प्रस्ताव वन विभाग को सौपा यानी आयआयटी की रिपोर्ट आने के एक साल बाद इस पर से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिडको के अधिकारी यहा किस स्पीड से काम कर रहे है. यह प्रस्ताव अब 101 वे स्टे जमीन लेवल से लगाने का है.
जिसके लिए अब फिर से वाईल्ड लाईफ की दिल्ली से परमीशन आवश्यक है. जिसे लाने की ताकत फिलहाल देवभाउ यानी सिर्फ मुख्यमंत्री की ही है. इसके पूर्व सांसद नवनीत राणा ने अपने सांसद रहते हुए यह परमीशन लायी थी. मगर उस समय भी परमीशन के लिए सालो लग गये थे. मगर इतने बडे प्रोजेक्ट पर काम करनेवाली सिडको जैसी एजन्सी जो कि प्यास लगने पर कुआं खोदने की रणनीति पर काम करते हुए दिखाई देती है. कोई नियोजन नहीं, कोई प्लॅनिंग नहीं, आज भी इतने बडे प्रोजेक्ट पर पार्कींग जैसी व्यवस्था का प्रस्ताव ही प्रोजेक्ट बनाते समय नहीं था. अब जाकर सिडको जगह मांगने तथा प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. जिसे देखते हुए पालकमंत्री को खुद इस बात का संज्ञान लेते हुए सिडको के पूरे कार्य की जांच करवाने की मांग पर्यटन क्षेत्र के व्यवसायी तथा जनता करते दिखाई.

 

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