अब अनुदानित खाद विक्रेताओं को ‘लिंकिंग’ अनिवार्य नहीं
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने दिया लिखित आश्वासन

* कृषि साहित्य विक्री केंद्र की बेमियाद हडताल स्थगित
अमरावती/दि.1– देश में खाद उत्पादक कंपनियों द्वारा अनुदानित खाद विक्रेताओं को ‘लिंकिंग’ अनिवार्य किया गया था. लेकिन अब उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राज्य में यह ‘लिंकिंग’ बंद किया जाएगा, ऐसा आश्वासन राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने दिया है. अब अनुदानित खाद विक्रेताओं को बिना अनुदानित उत्पादन खरीद की सख्ती करने का आदेश भी शासन द्वारा वापस लिया जाएगा. इसके साथ ही महाराष्ट्र फर्टीलायझर्स पेस्टिसाईड्स अँड सीडस् डीलर्स एसोसिएशन (माफदा) व जिला कृषि साहित्य विक्रेता संघ द्वारा घोषित विक्री केंद्र बंद आंदोलन को फिलहाल स्थगिती दी हैै. 2 हजार कृषि साहित्य विक्री केंद्र के ताले खुल गए थे.
उल्लेखनीय है कि, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की अध्यक्षता में 27 अप्रैल को हुई बैठक में कृषि विभाग ने कृषि साहित्य विक्रेताओं के हित में कई फैसले लिए. सब्सीडी वाले खाद के साथ गैर-सब्सीडी वाले उत्पादों की जबरन बिक्री नहीं की जा सकेगी. राज्य में हो रही एचबीटी बीजों की घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र को पत्र भेजा जाएगा. उत्पादन को दूसरे राज्यो में भी रोकने की मांग की जाएगी, बीजों की एंट्री के लिए ‘साथी’ पोर्टल से काम करना होगा, लेकिन बिक्री के बाद एंट्री में देरी की अवधि दो हफ्ते कर दी जाएगी और कार्रवाई स्थगित रहेगी.
रासायनिक खाद की सप्लाई विक्रेताओं के दरवाजे तक सीधे पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से बात की जाएगी. निविष्ठा अप्रमाणित निकलने पर विक्रेताओं पर कार्रवाई न करने के हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कर विक्रेताओं को दोषमुक्त रखने के लिए नई कार्यपद्धति तय की जाएगी. गुणवत्ता जांच के लिए नए नमूनों का शुल्क विक्रेताओं को देने के लिए आर्थिक प्रावधान किया जाएगा. कंपनियों द्वारा वापस लेने के लिए ‘माफदा’ और उत्पादक कंपनियों की संयुक्त बैठक होगी. स्टॉक मिलने के बाद गुणनियंत्रण निरीक्षक से जांच कराने की बाध्यता खत्म होगी. अब सिर्फ वीडियो रिकॉर्डींग कर तुरंत बिक्री की जा सकेगी. पडोसी राज्यों से आनेवाली नकली निविष्ठाओं पर रोक के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा. इन मांगों पर राज्य सरकार द्वारा सकारात्मक आश्वासन के पश्चात तीन दिनों से जारी हडताल को समाप्त कर दिया गया.
* हडताल के कारण करीब 30 से 40 करोड का नुकसान
जिला कृषि साहित्य विक्रेता संघ अध्यक्ष मिलिंद इंगोले ने बताया कि, विगत तीन दिनों से जारी बेमियादी हडताल के कारण कृषि साहित्य विक्रेताओं को करीब 30 से 40 करोड रुपयों का नुकसान हुआ है. हर दिन कृषि साहित्य की जिले में दो हजार केंद्र से 10 से 12 करोड रुपए की बिक्री होती है. फिलहाल खरीफ फसल का मौसम रहने से किसानों को खाद, बीज उपलब्ध होने दिक्कतों का सामना करना पडा. राज्य में करीब 85 हजार से 1 लाख कृषि केंद्र है. जो तीन दिनों तक पूरी तरह बंद रहे. अगर शासन ने अपना आश्वासन पूर्ण नहीं किया, तो आनेवाले समय में फिर से आंदोलन जारी रखा जाएगा.





