भाजपा की ओर से प्रवीण पोटे का नाम फाईनल!
27 या 29 मई को दाखिल करेंगे नामांकन

* भाजपा सहित महायुति के घटक दलों के सभी नेता व विधायक रहेंगे उपस्थित
* लगभग 3 माह पहले ही भाजपा ने तय कर लिया था पोटे का नाम
* अब अधिकृत घोषणा पर टिकी हुई हैं सभी की निगाहे
* लगातार तीसरी बार विधान परिषद का चुनाव लडने जा रहे पोटे
* पिछली बार ‘क्लिन स्वीप’ के साथ जीता था चुनाव
* इस बार के प्रदर्शन को लेेकर जबरदस्त उत्सुकता
अमरावती/दि.26 – अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की सीट हेतु आगामी 18 जून को होने जा रहे चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लगभग अपनी रणनीति तय कर ली है. जिसके तहत भाजपा नेतृत्व द्बारा अमरावती सीट के लिए भाजपा प्रत्याशी के तौर पर पूर्व राज्यमंत्री प्रवीण पोटे का नाम भाजपा नेतृत्व द्वारा लगभग फाइनल कर दिया गया है. जिसके बारे में अब केवल अधिकृत घोषणा बाकी मानी जा रही है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी की ओर से अधिकृत घोषणा होने के बाद पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे द्बारा आगामी 27 अथवा 29 मई को भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया जा सकता है. पोटे के नामांकन के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ महायुति के सभी घटक दलों के विधायक, जनप्रतिनिधि तथा प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे.
बताया जा रहा है कि पार्टी ने करीब तीन माह पहले ही आंतरिक स्तर पर पोटे के नाम पर सहमति बना ली थी और उसी के अनुरूप संगठनात्मक तैयारी भी शुरू कर दी गई थी. वहीं अब भाजपा द्बारा पूर्व राज्यमंत्री प्रवीण पोटे के नामांकन को केवल औपचारिक प्रक्रिया न रखकर शक्ति प्रदर्शन में बदलने की तैयारी में है. जिसके चलते नामांकन के समय जिले के भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे तथा जिले के भाजपा विधायक प्रताप अडसड, चंदू उर्फ उमेश यावलकर, प्रवीण तायडे, केवलराम काले व राजेश वानखडे सहित अमरावती की राकांपा (अजित) की विधायक सुलभा खोडके व बडनेरा के वायएसपी विधायक रवि राणा एवं राकांपा (अजित) के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य संजय खोडके के साथ ही महायुति के घटक दलों के सभी स्थानीय नेता व पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे. बता दें कि भाजपा नेता व पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल इससे पहले भी लगातार 2 बार अमरावती निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के चुनाव में विजयी हो चुके हैं और अब वे लगातार तीसरी बार विधान परिषद का चुनाव लड़ने जा रहे हैं. खास बात यह रही कि वर्ष 2012 में पहली बार विधान परिषद पहुंचनेवाले पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल ने राजनीति में काफी हद तक नए नवेले रहने के बावजूद अगले 6 वर्षों के दौरान राजनीतिक क्षेत्र में अपनी जबरदस्त पकड व पहचान बनाई. इसकी बदौलत उन्हें वर्ष 2014 से 2019 के दौरान अस्तित्व में रहनेवाली तत्कालीन सीएम फडणवीस की सरकार में राज्यमंत्री व जिला पालकमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली थी. जिसके उपरांत वर्ष 2018 में हुए अमरावती निकाय क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल ने बाकमाल प्रदर्शन करते हुए एक तरह से इतिहास रच डाला था और ‘क्लिन स्वीप’ जैसा परिणाम हासिल किया था. उस समय स्थानीय निकायों में भाजपा का मजबूत जनाधार और संगठनात्मक नेटवर्क निर्णायक साबित हुआ था. जिसे ध्यान में रखते हुए भाजपा ने एक बार फिर पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल के नाम पर ही दांव खेलने का निर्णय लिया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने इस बार उम्मीदवार चयन में किसी प्रकार का प्रयोग करने के बजाय अनुभवी और संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरे पर भरोसा जताया है. पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे की पहचान केवल भाजपा नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के बीच मजबूत संपर्क रखने वाले नेता के रूप में भी की जाती है. यही कारण है कि पार्टी उन्हें सेफ और मजबूत उम्मीदवार मान रही है.
उल्लेखनीय है कि अमरावती के निकाय निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा पिछली बार की तरह इस बार भी काफी हद तक बहुमत वाली स्थिति में है. जिसके चलते भाजपा इस बार भी उसी समीकरण के भरोसे मैदान में उतरती दिखाई दे रही है, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियां पहले की तुलना में कुछ बदली हुई मानी जा रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत महायुति का संयुक्त गणित माना जा रहा है. शिवसेना (शिंदे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) और भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों का समर्थन पोटे की राह को अपेक्षाकृत आसान बना सकता है. हालांकि विपक्ष की ओर से यदि कोई मजबूत और सर्वमान्य उम्मीदवार मैदान में उतरता है, तो मुकाबला रोचक हो सकता है.
भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे पाटिल की दावेदारी लगभग फाईनल रहने के चलते इस वक्त अमरावती जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और अधिकृत घोषणा होते ही चुनावी अभियान पूरी गति से शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं.
* परसो 28 को रहेगी बकरीद की छूट्टी
बता दें कि कैलेंडर में कल 27 मई को बकरीद पर्व पर सार्वजनिक अवकाश दर्शाया गया है. परंतु इस्लामीक कैलेंडर के हिसाब से बकरीद का पर्व परसो 28 मई को मनाया जाएगा. जिसके चलते सभी सरकारी कार्यालयों में कल 27 की बजाय परसो 28 मई को सार्वजनिक अवकाश रहेगा, ऐसे में कल 27 मई को विधान परिषद के चुनाव हेतु नामांकन की प्रक्रिया जारी रहेगी. और 28 मई के अवकाश पश्चात 29 मई से 1 जून तक नामांकन प्रक्रिया चलती रहेगी. यहीं वजह है की पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे द्बारा कल 27 अथवा 29 मई को नामांकन दायर किए जाने की पूरी संभावना है.





