आर्थिक संयम केवल गरीब ही क्यों बरतें?
‘वंचित’ के मुखिया एड. आंबेडकर का सरकार से सवाल

* रुपये की गिरावट से अमीरों को फायदा होने की बात कही
* महंगाई का बोझ आम जनता पर पड़ने का आरोप
मुंबई/दि.27 – वंचित बहुजन पार्टी के मुखिया एड. प्रकाश आंबेडकर ने भारतीय रुपये में लगातार हो रही गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि रुपये के अवमूल्यन का सीधा लाभ विदेशों में डॉलर एवं स्विस फ्रैंक में निवेश रखने वाले धनाढ्यों को मिल रहा है, जबकि महंगाई का बोझ आम जनता, मजदूरों और मध्यमवर्ग पर पड़ रहा है.
एड. आंबेडकर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट आई है और वर्तमान में एक डॉलर के लिए करीब 95.73 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं. इससे जीवनावश्यक वस्तुओं के आयात का खर्च बढ़ गया है, जिसके कारण महंगाई में वृद्धि हुई है और किराना, ईंधन तथा परिवहन आम लोगों के लिए महंगे हो गए हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि आर्थिक संयम की अपेक्षा केवल गरीबों और मध्यमवर्गीय लोगों से ही क्यों की जाती है. उनका कहना था कि जिन लोगों की संपत्ति डॉलर अथवा स्विस बैंकों में जमा विदेशी मुद्रा से जुड़ी हुई है, उन्हें रुपये की गिरावट से उल्टा आर्थिक लाभ हो रहा है. एड. प्रकाश आंबेडकर के अनुसार वर्ष 2025 में 162 भारतीय कंपनियों ने विदेशों में कंपनियों के अधिग्रहण पर 18 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है. उन्होंने सन फार्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी ने ‘ऑर्गानॉन एंड कंपनी’ के अधिग्रहण के लिए 11.75 अरब डॉलर के नकद सौदे को मंजूरी दी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में भारतीय रुपये का मूल्य स्विस फ्रैंक के मुकाबले औसतन प्रतिवर्ष लगभग 6 प्रतिशत गिरा है. इससे स्विस बैंकों में जमा भारतीयों की विदेशी संपत्तियों का मूल्य रुपये के हिसाब से काफी बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि बढ़कर लगभग 37,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
इसके साथ ही एड. प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि जब-जब रुपये का मूल्य गिरता है, तब-तब विदेशी मुद्रा में रखी गई संपत्तियों का मूल्य स्वतः बढ़ जाता है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आर्थिक अनुशासन मजदूरों और उपभोक्ताओं के लिए बोझ क्यों बनता है, जबकि अमीरों के लिए वही स्थिति आर्थिक लाभ में बदल जाती है.





