शिक्षक की बेटी बनाएगी ‘भविष्य का पुल’
हिरापूर से न्यूयॉर्क तक

* न्यूयॉर्क ‘यूनिवर्सिटी ऍट बफेलो’ में लावंण्या को मिला संशोधन का अवसर
अमरावती/दि.28 – जिले के अंजनगांव तहसील के छोटे से गांव हिरापूर की प्रतिभाशाली छात्रा लावंण्या दखने ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ‘यूनिवर्सिटी ऍट बफेलो’ में रिसर्च करने का अवसर हासिल किया है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी गांधीनगर में सिविल इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही लावंण्या का चयन अंतरराष्ट्रीय रिसर्च फेलोशिप के लिए हुआ है. इस उपलब्धि से दखने परिवार के साथ-साथ पूरे अमरावती जिले का नाम रोशन हुआ है.
लावंण्या का पारिवारिक जीवन बेहद साधारण रहा है. उनके दादा रमेशराव दखने किसान हैं, जबकि पिता प्रमोद दखने केंद्रप्रमुख के पद पर कार्यरत हैं. मां मीनल दखने आशा वर्कर होने के साथ पूर्व सरपंच भी रह चुकी हैं. शिक्षा, अनुशासन और सेवा भावना के संस्कारों के बीच पली-बढ़ी लावण्या ने कठिन परिश्रम के बल पर आईआईटी में प्रवेश हासिल किया. दखने परिवार से आईआईटी में पहुंचने और रिसर्च के लिए विदेश जाने वाली वह पहली सदस्य बनी हैं. लावंण्या फिलहाल ‘थ्रीडी प्रिंटेड टिकाऊ कांक्रीट कवर्स’ विषय पर अत्याधुनिक रिसर्च करने जा रही हैं. उनका अध्ययन समुद्री क्षेत्रों और अन्य संरचनाओं में इस्तेमाल होने वाले कंक्रीट गिर्डर्स में पड़ने वाली दरारों को रोकने तथा स्वयं मरम्मत करने वाले स्मार्ट कंक्रीट विकसित करने पर केंद्रित है. थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से भविष्य में अधिक मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित निर्माण सामग्री तैयार करना इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य है.
लावंण्या की शोध क्षमता को देखते हुए न्यूयॉर्क की ‘यूनिवर्सिटी एट बफेलो’ ने उन्हें दो महीने के रिसर्च प्रोग्राम के लिए आमंत्रित किया है. इस दौरान वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों के साथ काम करेंगी. उनकी इस उपलब्धि के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालय की ओर से 3,500 डॉलर और आईआईटी गांधीनगर की ओर से 1,100 डॉलर की सहायता दी गई है. इस तरह उन्हें कुल 4,600 डॉलर यानी लगभग 4.40 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मंजूर हुई है. हिरापूर जैसे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर वैश्विक रिसर्च जगत तक पहुंची लावण्या दखने की सफलता आज हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन रही है.
* क्या है ‘थ्रीडी प्रिंटेड टिकाऊ कांक्रीट कवर्स’ रिसर्च?
बड़े पुलों और फ्लाईओवरों में इस्तेमाल होने वाले कांक्रीट गिर्डर्स में समय के साथ दरारें पड़ने लगती हैं. यदि ये दरारें बढ़ जाएं तो पूरी संरचना की मजबूती और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. लावण्या दखने का रिसर्च इन्हीं दरारों को शुरुआती स्तर पर रोकने पर आधारित है. ‘प्रिवेंटिव थ्रीडी प्रिंटेड कांक्रीट कवर्स’ तकनीक के जरिए अधिक मजबूत और टिकाऊ कांक्रीट तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है. इस तकनीक से गिर्डर्स में दरारें आने की संभावना कम होगी और पुलों की आयु बढ़ाने में मदद मिलेगी.





