अकोला में 8 करोड़ के घोटाले में पिता-पुत्र गिरफ्तार

गजानन पतसंस्था में गैरव्यवहार

* अध्यक्ष और सीईओ गिरफ्तार
* जमाकर्ताओं के 25 करोड़ फंसे
अकोला /दि.28- अकोला की श्री. गजानन नागरी सहकारी पतसंस्था में 8 करोड़ 97 लाख रुपए के गबन का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इस प्रकरण में आर्थिक अपराध शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पतसंस्था के अध्यक्ष नारायण आवारे और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे उनके पुत्र नंदकिशोर आवारे को गिरफ्तार किया है. इस घटना से शहर के जमाकर्ताओं में भारी हलचल मच गई है और हजारों निवेशकों के पैसे फंस गए हैं. अकोला के डाबकी रोड पुलिस थाने में इस मामले में अपराध दर्ज किया गया है. आर्थिक अपराध शाखा की जांच में पतसंस्था के आर्थिक व्यवहारों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं. इसके बाद अध्यक्ष नारायण आवारे और उनके पुत्र नंदकिशोर आवारे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अदालत में पेश करने की प्रक्रिया जारी है.
श्री. गजानन नागरी सहकारी पतसंस्था में बड़े पैमाने पर आर्थिक गैरव्यवहार होने की शिकायत पिछले कई महीनों से सामने आ रही थी. जमाकर्ताओं ने बार-बार पैसे वापस मांगे, लेकिन संस्था की ओर से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा था. पिछले 6 महीनों से जमाकर्ताओं को भुगतान देना बंद कर दिया गया था. इससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही थी. आखिरकार कई शिकायतों और प्राथमिक जांच के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए बड़ी कार्रवाई की. जांच में संस्था में करोड़ों रुपए के गबन का खुलासा हुआ.
इस पतसंस्था में लगभग ढाई हजार जमाकर्ताओं के पैसे फंसे होने की जानकारी सामने आई है. नौकरीपेशा, पेंशनधारक, मजदूर तथा घरकाम करने वाली महिलाओं ने अपनी जीवनभर की बचत इस संस्था में जमा की थी. संस्था में कुल जमा राशि 25 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है. जमाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संस्था के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गबन की गई राशि कहीं और निवेश की. इससे आम नागरिकों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी होने की भावना व्यक्त की जा रही है. इस मामले से सहकारी पतसंस्थाओं के कामकाज पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं. जमाकर्ताओं ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
* फंसी हुई राशि वापस कब मिलेगी, इसको लेकर चिंता
इस बीच, श्री. गजानन नागरी सहकारी पतसंस्था की अकोला में 2 तथा तेल्हारा में 1 शाखा कार्यरत होने की जानकारी है. अप्रैल महीने से संस्था द्वारा जमाकर्ताओं को पैसे देना बंद कर दिया गया था. इसके बाद नागरिकों ने आंदोलन की चेतावनी दी थी. अब इस कार्रवाई के बाद जमाकर्ताओं को कुछ राहत मिली है, लेकिन फंसी हुई राशि वापस कब मिलेगी, इसको लेकर बड़ी चिंता बनी हुई है.

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