संरक्षण दीवार निर्माण को लेकर विवाद

श्री विठोबा संस्थान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

चांदूर रेलवे /दि.3- चांदूर रेल्वे तहसील के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सावंगा विठोबा में ग्रामीण तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर विवाद गहरा गया है. श्री विठोबा संस्थान उर्फ श्रीकृष्ण अवधूत बुवा संस्थान ने प्रशासन पर लगातार शिकायतों और ज्ञापनों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए मामले में उच्च न्यायालय की शरण ली है. संस्थान ने गुट क्रमांक 5 में चल रहे संरक्षण दीवार (रिटेनिंग वॉल) के निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है.
संस्थान के अध्यक्ष पुंजाराम नेमाडे और सचिव अशोक सोनवाल के अनुसार, ग्रामीण तीर्थक्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत गुट क्रमांक 5 में संरक्षण दीवार का निर्माण किया जा रहा है. उनका आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित भूमि का उचित सर्वेक्षण और सीमांकन नहीं किया गया, जिसके कारण कई तकनीकी खामियां और विसंगतियां सामने आई हैं. संस्थान का दावा है कि दीवार गलत स्थान पर बनाई जा रही है. सञ्च्ंस्थान का कहना है कि प्रस्तावित संरक्षण दीवार के कारण परिसर के कुछ छोटे मंदिरों के जलमग्न होने का खतरा पैदा हो गया है. इसके अलावा, दीवार के लिए खोदी गई नींव निर्धारित स्थान के बजाय अन्य जगह खोदी गई है, जिससे गुट क्रमांक 5 में अनावश्यक विभाजन की स्थिति बन रही है. इससे मंदिर परिसर के प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजा-अर्चना में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.
संस्थान ने यह भी आरोप लगाया है कि इस निर्माण कार्य के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है. इस संबंध में संस्थान ने मुख्यमंत्री, ग्राम विकास मंत्री, अमरावती के जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पंचायत समिति चांदूर रेलवे के गट विकास अधिकारी तथा निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन और स्मरण पत्र सौंपे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
प्रशासन की कथित उदासीनता से निराश होकर संस्थान ने अधिवक्ता गजेंद्र सदार के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. न्यायालय ने 26 मई 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं. साथ ही जिलाधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद अमरावती को संस्थान द्वारा प्रस्तुत निवेदन पर उचित निर्णय लेने के लिए अंतरिम निर्देश भी दिए हैं. इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीण तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत चल रहे कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं. अब स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों की नजर प्रशासन तथा न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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