विधायक बच्चू कडू एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में
पहले अभिनंदन, फिर सरकार की आलोचना

* कर्ज माफी से संतुष्ट नहीं, कर्जमुक्ति की मांग उठाई
अमरावती /दि.3– गत रोज हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार द्बारा पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी गई है. जिसके चलते अब किसानों का दो लाख रूपए तक का बकाया कर्ज माफ हो जायेगा.. इस समय विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता जारी रहने के चलते इस संदर्भ में शासन निर्णय जारी नहीं होगा. बल्कि आचार संहिता के खत्म होने के बाद सरकार द्बारा इस संदर्भ ेमें अध्यादेश जारी किया जायेगा.
बता दें कि किसान कर्जमाफी के लिए पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने जबर्दस्त आंदोलन किया था. जिसके चलते कर्जमाफी को मंजूरी मिलने के उपरांत विधायक बच्चू कडु ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए सरकार का अभिनंदन भी किया. साथ ही अपने तेवर बदलते हुए यह भी कहा कि वे केवल कर्जमाफी की घोषणा से संतुष्ट नहीं है. बल्कि सरकार द्बारा किसानों को पूरी तरह से कर्जमुक्त किया जाना चाहिए और 1 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जानी चाहिए. अपनी इस मांग के लिए वे जरूरत पडने पर एक बार फिर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर सकते हैं.
सरकार द्बारा की गई किसान कर्जमाफी की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री बच्चू कडू ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के प्रति आभार जताने के साथ ही किसान आंदोलन में अपने साथ सहभागी हुए पूर्व सांसद राजू शेट्टी, पूर्व मंत्री महादेव जानकर सहित वामनराव चटप, डॉ. अजीत नवले व रविकांत तुपकर के प्रति भी कृतज्ञता जताई.
केवल वोटों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला
वहीं दूसरी ओर शेतकरी संगठन के वरिष्ठ नेता रघुनाथ दादा पाटिल ने किसान कर्जमाफी को मंजूरी देने के संदर्भ में राज्य सरकार द्बारा लिए गये फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह फैसला केवल वोटों की राजनीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. सरकार द्बारा विगत अनेक वर्षो से किसानों को 50 हजार रूपए का अनुदान देने की मांग की जा रही है. लेकिन अब तक यह अनुदान नहीं दिया गया. साथ ही किसान अपने लिए कर्जमुक्ति की मांग कर रहे है और सरकार द्बारा कर्जमाफी का निर्णय लिया जा रहा है. जिसका सीधा मतलब है कि सरकार को कर्जमुक्ति और कर्जमाफी के बीच का फर्क ही नहीं समझ में आ रहा. साथ ही सरकार किसानों को कर्जमाफी भी नहीं देना चाहती. यही वजह है कि आचार संहिता के दौरान जानबूझकर निर्णय लिया गया और निर्णय लागू करने के लिए आचार संहिता की वजह को आगे किया जा रहा है.





